Manipur Board conducted the Class 12 Hindi Board Exam 2026 on March 20, 2026. Class 12 Hindi Question Paper with Solution PDF is available here for download.
The Manipur Board Class 12 Hindi paper covered key topics from Hindi literature, grammar, poetry, and composition. Students should focus on understanding the themes of literary works, mastering grammar rules, and improving writing skills. The exam is marked out of 100, with 80 marks for the theory paper and 20 for internal assessment.
Manipur Board Class 12 2026 Hindi Question Paper with Solution PDF
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भक्तिन का वास्तविक नाम क्या था? वह अपना वास्तविक नाम क्यों छुपाती थी?
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Concept:
यह प्रश्न महादेवी वर्मा की प्रसिद्ध रचना ‘भक्तिन’ पर आधारित है। इसमें लेखिका ने एक साधारण स्त्री के जीवन, उसकी श्रद्धा और सामाजिक परिस्थितियों का चित्रण किया है। नाम छुपाने का कारण उसके व्यक्तित्व और सामाजिक मानसिकता को दर्शाता है।
उत्तर:
भक्तिन का वास्तविक नाम लछमिन (लक्ष्मी) था। वह अपना वास्तविक नाम इसलिए छुपाती थी क्योंकि उसे लगता था कि उसका यह साधारण नाम उसके भक्तिभाव और आध्यात्मिक पहचान के अनुरूप नहीं है।
वह स्वयं को ईश्वर की सच्ची भक्त के रूप में प्रस्तुत करना चाहती थी, इसलिए उसने ‘भक्तिन’ नाम अपना लिया। इसके माध्यम से वह अपनी पहचान को एक श्रद्धालु और धार्मिक स्त्री के रूप में स्थापित करना चाहती थी, न कि केवल एक सामान्य ग्रामीण महिला के रूप में। Quick Tip: महादेवी वर्मा की रचनाओं में पात्रों के नाम अक्सर उनके व्यक्तित्व और भावनात्मक स्थिति को दर्शाते हैं। ‘भक्तिन’ नाम उसके गहरे धार्मिक स्वभाव को प्रकट करता है।
भक्तिन के आ जाने से महादेवी अधिक देहाती कैसे हो गई?
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Concept:
यह प्रश्न महादेवी वर्मा की रचना ‘भक्तिन’ से लिया गया है, जिसमें भक्तिन के प्रभाव से लेखिका के जीवन-शैली में आए परिवर्तन का वर्णन है। यह परिवर्तन ग्रामीण जीवन की सादगी और व्यवहार को दर्शाता है।
उत्तर:
भक्तिन के आ जाने से महादेवी के जीवन में कई देहाती परिवर्तन आ गए। भक्तिन स्वयं एक ग्रामीण स्त्री थी, इसलिए उसका रहन-सहन, बोलचाल और खान-पान पूरी तरह देहाती था।
उसके प्रभाव से महादेवी भी धीरे-धीरे देहाती आदतों को अपनाने लगीं। उनके भोजन में सादगी आ गई, वे अधिक घरेलू और पारंपरिक तरीके से रहने लगीं, तथा उनके व्यवहार और दिनचर्या में भी ग्रामीणपन झलकने लगा।
भक्तिन की सादगी, सेवा-भाव और प्राकृतिक जीवन-शैली ने महादेवी को इतना प्रभावित किया कि उनका जीवन भी शहरी से अधिक देहाती प्रतीत होने लगा। Quick Tip: संगति का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर गहरा पड़ता है। ‘भक्तिन’ पाठ में यह स्पष्ट होता है कि एक साधारण ग्रामीण स्त्री भी अपने गुणों से किसी के जीवन-शैली को बदल सकती है।
बाज़ार का जादू चढ़ने और उतरने पर मनुष्य पर क्या-क्या असर पड़ता है?
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Concept:
यह प्रश्न ‘बाज़ार दर्शन’ पाठ पर आधारित है, जिसमें लेखक ने बाज़ार के आकर्षण और उसके मनोवैज्ञानिक प्रभाव का विश्लेषण किया है। बाज़ार का जादू व्यक्ति की इच्छाओं, आवश्यकताओं और सोच को प्रभावित करता है।
उत्तर:
जब बाज़ार का जादू मनुष्य पर चढ़ता है, तब वह आकर्षण और लालच में आकर अनावश्यक वस्तुएँ खरीदने लगता है। उसे हर वस्तु आवश्यक और आकर्षक लगने लगती है। उसकी सोच प्रभावित हो जाती है और वह दिखावे तथा उपभोग की प्रवृत्ति में फँस जाता है।
लेकिन जब यह जादू उतर जाता है, तब मनुष्य को अपनी भूल का एहसास होता है। उसे लगता है कि उसने बिना सोचे-समझे पैसे खर्च कर दिए और कई वस्तुएँ अनावश्यक थीं। इस स्थिति में वह पछताता है और अधिक सावधान हो जाता है।
अतः बाज़ार का जादू चढ़ने पर व्यक्ति विवेक खो देता है, जबकि उतरने पर उसे वास्तविकता का बोध होता है और वह अपनी गलतियों से सीखता है। Quick Tip: बाज़ार का आकर्षण क्षणिक होता है, इसलिए खरीदारी करते समय विवेक और आवश्यकता का ध्यान रखना चाहिए।
लेखक ने शिरीष को 'कालजयी अवधूत' (संन्यासी) की तरह क्यों माना है?
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Concept:
यह प्रश्न ‘शिरीष के फूल’ पाठ पर आधारित है, जिसमें लेखक ने शिरीष वृक्ष के गुणों के माध्यम से जीवन-दर्शन प्रस्तुत किया है। ‘कालजयी अवधूत’ का अर्थ है ऐसा संन्यासी जो समय, परिस्थितियों और भौतिक आकर्षणों से परे हो।
उत्तर:
लेखक ने शिरीष को ‘कालजयी अवधूत’ इसलिए माना है क्योंकि वह वृक्ष अत्यंत सरल, सहनशील और निर्लिप्त स्वभाव का होता है। वह कठोर से कठोर परिस्थितियों—जैसे गर्मी, धूल और आंधी—को भी सहजता से सहन करता रहता है, परंतु कभी शिकायत नहीं करता।
शिरीष के फूल कोमल और सुगंधित होते हैं, जो उसकी आंतरिक कोमलता को दर्शाते हैं, जबकि बाहर से वह दृढ़ और स्थिर बना रहता है। यह गुण एक सच्चे संन्यासी की तरह है, जो संसार में रहते हुए भी उससे प्रभावित नहीं होता।
इसी प्रकार शिरीष वृक्ष समय के साथ भी अपनी प्रकृति नहीं बदलता और निरंतर अपने स्वभाव में स्थिर रहता है। इसलिए लेखक ने उसे ‘कालजयी अवधूत’ की संज्ञा दी है। Quick Tip: ‘शिरीष’ वृक्ष जीवन में धैर्य, सहनशीलता और निष्काम भाव का प्रतीक है—यही गुण एक सच्चे संन्यासी में भी होते हैं।
‘काले मेघा पानी दे’ संस्मरण के आधार पर जीजी के तर्क और लेखक के विचारों का विश्लेषण कीजिए।
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Concept:
यह प्रश्न ‘काले मेघा पानी दे’ संस्मरण पर आधारित है, जिसमें लोक-विश्वास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच के अंतर को दर्शाया गया है। इसमें जीजी पारंपरिक मान्यताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि लेखक तर्कसंगत और आधुनिक सोच को प्रस्तुत करता है।
उत्तर:
जीजी का विश्वास था कि विशेष परंपराओं और अनुष्ठानों के माध्यम से वर्षा कराई जा सकती है। वे मानती थीं कि बच्चों द्वारा ‘काले मेघा पानी दे’ गाना गाने, कीचड़ में लोटने और कुछ विशेष क्रियाएँ करने से इंद्र देव प्रसन्न होते हैं और वर्षा होती है। उनके तर्क पूरी तरह लोक-विश्वास, आस्था और परंपरा पर आधारित थे।
इसके विपरीत, लेखक इन मान्यताओं को तर्क और विज्ञान की कसौटी पर परखता है। वह मानता है कि वर्षा एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो मौसम और वातावरण के वैज्ञानिक कारणों से होती है, न कि किसी अनुष्ठान या गीत के कारण।
लेखक जीजी की भावनाओं और परंपराओं का सम्मान तो करता है, परंतु वह अंधविश्वास को स्वीकार नहीं करता। उसके विचार तार्किक, वैज्ञानिक और यथार्थवादी हैं।
अतः इस संस्मरण में जीजी और लेखक के विचारों के माध्यम से परंपरा और आधुनिकता, आस्था और तर्क के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से सामने आता है। Quick Tip: परीक्षा में ऐसे प्रश्नों में दोनों पक्षों (परंपरा बनाम तर्क) को संतुलित रूप से लिखना आवश्यक होता है।
‘आत्मपरिचय’ कविता में कवि ने संसार के साथ अपने संबंधों को किस प्रकार द्वंद्वात्मक बताया है?
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Concept:
यह प्रश्न ‘आत्मपरिचय’ कविता पर आधारित है, जिसमें कवि ने अपने व्यक्तित्व और संसार के साथ अपने संबंधों को विरोधाभासी (द्वंद्वात्मक) रूप में प्रस्तुत किया है। द्वंद्वात्मकता का अर्थ है—एक साथ दो विपरीत भावों या स्थितियों का होना।
उत्तर:
‘आत्मपरिचय’ कविता में कवि ने अपने और संसार के संबंधों को द्वंद्वात्मक इसलिए बताया है क्योंकि वह एक ओर संसार से जुड़ा हुआ भी है और दूसरी ओर उससे अलग भी महसूस करता है।
कवि कभी स्वयं को समाज का हिस्सा मानता है, उसकी खुशियों और दुखों से जुड़ता है, तो कभी वह स्वयं को सबसे अलग, अकेला और स्वतंत्र अनुभव करता है। वह प्रेम भी करता है, परंतु विरक्ति भी रखता है; वह जीवन को अपनाता भी है और उससे दूरी भी बनाता है।
इस प्रकार कवि के भीतर लगाव और विरक्ति, अपनापन और अलगाव, आशा और निराशा जैसे विरोधी भाव एक साथ उपस्थित हैं। यही विरोधाभास उसके संसार के साथ संबंधों को द्वंद्वात्मक बनाता है। Quick Tip: द्वंद्वात्मकता का अर्थ है—दो विपरीत भावों का एक साथ होना। कविता में ऐसे शब्दों और भावों को पहचानकर उत्तर लिखना अधिक प्रभावी होता है।
‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ की आवृत्ति से कविता की किस विशेषता का पता चलता है?
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Concept:
यह प्रश्न कविता में प्रयुक्त पुनरावृत्ति (Repetition) अलंकार से संबंधित है। किसी पंक्ति या शब्द की बार-बार आवृत्ति कविता के भाव, लय और विशेष अर्थ को उभारने के लिए की जाती है।
उत्तर:
‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ पंक्ति की बार-बार आवृत्ति से कविता की लयात्मकता और भावों की तीव्रता का पता चलता है। यह पुनरावृत्ति समय के तेजी से बीतने का एहसास कराती है।
कवि इस पंक्ति के माध्यम से जीवन की क्षणभंगुरता और समय की निरंतर गति को व्यक्त करता है। बार-बार दोहराने से यह भावना और अधिक प्रभावशाली हो जाती है कि समय किसी के लिए नहीं रुकता।
इसके साथ ही यह पुनरावृत्ति कविता में एक विशेष संगीतात्मकता भी उत्पन्न करती है, जिससे पाठक पर गहरा प्रभाव पड़ता है। Quick Tip: कविता में किसी पंक्ति की आवृत्ति प्रायः उसके मुख्य भाव, लय और संदेश को उभारने के लिए की जाती है।
‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता के आधार पर बताइए कि मीडिया का रवैया संवेदनहीन क्यों है?
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Concept:
यह प्रश्न ‘कैमरे में बंद अपाहिज’ कविता पर आधारित है, जिसमें कवि ने मीडिया की कार्यप्रणाली और उसके मानवीय संवेदनाओं के अभाव को उजागर किया है। कविता मीडिया की TRP और सनसनीखेज़ प्रस्तुति की प्रवृत्ति की आलोचना करती है।
उत्तर:
कविता के अनुसार मीडिया का रवैया संवेदनहीन इसलिए है क्योंकि वह एक अपाहिज व्यक्ति की पीड़ा और असहायता को समझने के बजाय उसे केवल एक समाचार या तमाशे के रूप में प्रस्तुत करता है।
मीडिया उस व्यक्ति की भावनाओं और सम्मान की परवाह किए बिना उसकी कमजोरी और दुख को बार-बार कैमरे में कैद करता है, ताकि दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया जा सके। उसका उद्देश्य सहानुभूति प्रकट करना नहीं, बल्कि TRP बढ़ाना और सनसनी फैलाना होता है।
इस प्रक्रिया में वह मानवता और संवेदनशीलता को नजरअंदाज कर देता है। अपाहिज व्यक्ति की गरिमा और आत्मसम्मान को ठेस पहुँचती है, लेकिन मीडिया केवल अपनी प्रस्तुति और लोकप्रियता पर ध्यान देता है।
इस प्रकार कविता यह स्पष्ट करती है कि मीडिया मानवीय मूल्यों से अधिक लाभ और प्रसिद्धि को महत्व देता है, इसलिए उसका रवैया संवेदनहीन प्रतीत होता है। Quick Tip: ऐसे प्रश्नों में कविता का मुख्य संदेश—मानवता बनाम स्वार्थ—स्पष्ट रूप से लिखना उत्तर को प्रभावशाली बनाता है।
‘उषा’ कविता में कवि ने नए बिंबों और प्रतीकों का प्रयोग किस प्रकार किया है?
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Concept:
यह प्रश्न ‘उषा’ कविता पर आधारित है, जिसमें कवि ने प्रातःकालीन प्रकृति के सौंदर्य को नवीन बिंबों (imagery) और प्रतीकों के माध्यम से प्रस्तुत किया है। बिंब और प्रतीक कविता को दृश्यात्मक और प्रभावशाली बनाते हैं।
उत्तर:
‘उषा’ कविता में कवि ने नए और सजीव बिंबों का प्रयोग करके सुबह के दृश्य को अत्यंत आकर्षक बना दिया है। कवि ने उषा (प्रभात) को विभिन्न रूपों में प्रस्तुत किया है, जैसे—आकाश को नीले रंग का विशाल कैनवास, उस पर फैलती लालिमा, और प्रकाश का धीरे-धीरे फैलना।
कवि ने प्रकृति के साधारण दृश्यों को नए प्रतीकों के माध्यम से व्यक्त किया है, जैसे—
उषा को एक नवयौवना के रूप में देखना, प्रकाश को जीवन और आशा का प्रतीक बनाना, तथा अंधकार को अज्ञान या निराशा के रूप में प्रस्तुत करना।
इन नवीन बिंबों के कारण पाठक के सामने एक सजीव चित्र उभरता है, जिससे वह उषाकाल की सुंदरता को अनुभव कर सकता है। इस प्रकार कवि ने नए प्रतीकों और बिंबों के माध्यम से कविता को चित्रात्मक, प्रभावशाली और भावपूर्ण बना दिया है। Quick Tip: कविता में बिंब (imagery) दृश्य उत्पन्न करते हैं और प्रतीक (symbol) गहरे अर्थ प्रदान करते हैं—दोनों मिलकर कविता को प्रभावशाली बनाते हैं।
‘बादल राग’ कविता में सुख को अस्थिर क्यों कहा गया है?
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Concept:
यह प्रश्न ‘बादल राग’ कविता पर आधारित है, जिसमें कवि ने जीवन की क्षणभंगुरता और प्रकृति के परिवर्तनशील स्वरूप के माध्यम से सुख-दुख के सत्य को व्यक्त किया है।
उत्तर:
‘बादल राग’ कविता में सुख को अस्थिर इसलिए कहा गया है क्योंकि कवि ने उसे बादलों के समान परिवर्तनशील बताया है। जैसे आकाश में बादल आते हैं और थोड़ी देर बाद छंट जाते हैं, उसी प्रकार जीवन में सुख भी स्थायी नहीं रहता।
कवि के अनुसार सुख क्षणिक होता है—वह कुछ समय के लिए आता है और फिर चला जाता है। इसके विपरीत, जीवन में दुख भी आता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सुख और दुख दोनों ही स्थायी नहीं हैं, बल्कि समय के साथ बदलते रहते हैं।
इस प्रकार कवि यह संदेश देना चाहता है कि मनुष्य को सुख में अधिक आसक्त नहीं होना चाहिए, क्योंकि वह टिकाऊ नहीं है। जीवन का सत्य परिवर्तन है, और यही कारण है कि सुख को अस्थिर कहा गया है। Quick Tip: प्रकृति के माध्यम से जीवन के सत्य को समझाना कविताओं की प्रमुख विशेषता होती है—यहाँ बादल परिवर्तनशीलता का प्रतीक हैं।
दिए गए विषय पर लगभग 200 शब्दों में सारगर्भित निबंध लिखिए: प्रदूषण की समस्या
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Concept:
निबंध लेखन में विषय की स्पष्ट समझ, सुव्यवस्थित विचार, तथा भाषा की शुद्धता और प्रभावशीलता महत्वपूर्ण होती है। प्रस्तावना, मुख्य भाग और निष्कर्ष का संतुलित प्रस्तुतीकरण आवश्यक है।
निबंध:
प्रदूषण आज के समय की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। यह न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि मानव जीवन के लिए भी घातक सिद्ध हो रहा है। प्रदूषण के मुख्य प्रकार हैं—वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और भूमि प्रदूषण।
वायु प्रदूषण वाहनों के धुएँ, कारखानों से निकलने वाली गैसों और जंगलों की कटाई के कारण बढ़ रहा है। इससे श्वसन संबंधी रोग उत्पन्न होते हैं। जल प्रदूषण नदियों और जलस्रोतों में कचरा और रासायनिक पदार्थों के मिल जाने से होता है, जिससे जल जीवों का जीवन संकट में पड़ जाता है और पीने योग्य जल की कमी हो जाती है।
ध्वनि प्रदूषण तेज आवाज़ों, मशीनों और वाहनों के कारण होता है, जिससे मानसिक तनाव और स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। भूमि प्रदूषण कचरे और प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग से बढ़ रहा है।
प्रदूषण की समस्या का समाधान सामूहिक प्रयास से ही संभव है। हमें पेड़ लगाने चाहिए, प्लास्टिक का कम उपयोग करना चाहिए, तथा स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। सरकार के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह पर्यावरण की रक्षा करे। Quick Tip: निबंध लिखते समय प्रस्तावना, कारण, प्रभाव और समाधान—इन चार भागों को अवश्य शामिल करें।
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्यों में प्रयोग कीजिए: (नौ दो ग्यारह होना, श्री गणेश करना)।
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Concept:
मुहावरे भाषा को प्रभावशाली और रोचक बनाते हैं। इनका अर्थ शाब्दिक न होकर भावात्मक होता है, इसलिए इन्हें वाक्यों में सही संदर्भ के साथ प्रयोग करना आवश्यक होता है।
(1) नौ दो ग्यारह होना
अर्थ: जल्दी से भाग जाना या गायब हो जाना।
वाक्य: पुलिस को देखते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गया।
(2) श्री गणेश करना
अर्थ: किसी कार्य की शुरुआत करना।
वाक्य: शिक्षक ने नए सत्र का श्री गणेश प्रार्थना के साथ किया। Quick Tip: मुहावरों का प्रयोग करते समय उनके भावार्थ को समझकर ही वाक्य बनाना चाहिए, तभी भाषा प्रभावशाली बनती है।








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