The UP Board Class 12 General Hindi (Samanya Hindi) question paper with solutions (Set 302 BI) is available here for free download. UP Board Class 12 General Hindi 2026 was conducted by the Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Parishad (UPMSP) on February 18, 2026, as a 100-mark paper of 14 compulsory questions to be solved in 3 hours 15 minutes.
| UP Board Class 12 General Hindi 2026 Question Paper with Solutions (Set 302 BI) | Download PDF | Check Solutions |
UP Board Class 12 Hindi General 2026 (Set 302 BI) Questions with Solutions
हिन्दी का पहला पत्र है
'कंकाल' उपन्यास के लेखक हैं
'चिंतामणि' रचना की विधा है
'कल्पलता' के लेखक हैं
'गुलाबराय' लेखक हैं
'तारसप्तक' के कवि हैं
'उर्वशी' रचना है
'सांध्यगीत' काव्य-संकलन है
'बसंती हवा' कविता है
जयशंकर प्रसाद का महाकाव्य है
गद्यांश: यह प्रणाम-भाव ही भूमि और जन का दृढ़ बन्धन है। इसी दृढ़ भित्ति पर राष्ट्र का भवन तैयार किया जाता है। इसी दृढ़ चट्टान पर राष्ट्र का चिर जीवन आश्रित रहता है। इसी मर्यादा को मानकर राष्ट्र के प्रति मनुष्यों के कर्तव्य और अधिकारों का उदय होता है। जो जन पृथ्वी के साथ माता और पुत्र के संबंध को स्वीकार करता है, उसे पृथ्वी के वरदानों में भाग पाने का अधिकार है। माता के प्रति अनुराग और सेवाभाव पुत्र का स्वाभाविक कर्तव्य है। वह एक निष्कारण धर्म है। स्वार्थ के लिए पुत्र का माता के प्रति प्रेम, पुत्र के अधःपतन को सूचित करता है।
गद्यांश: यह प्रणाम-भाव ही भूमि और जन का दृढ़ बन्धन है। इसी दृढ़ भित्ति पर राष्ट्र का भवन तैयार किया जाता है। इसी दृढ़ चट्टान पर राष्ट्र का चिर जीवन आश्रित रहता है। इसी मर्यादा को मानकर राष्ट्र के प्रति मनुष्यों के कर्तव्य और अधिकारों का उदय होता है। जो जन पृथ्वी के साथ माता और पुत्र के संबंध को स्वीकार करता है, उसे पृथ्वी के वरदानों में भाग पाने का अधिकार है। माता के प्रति अनुराग और सेवाभाव पुत्र का स्वाभाविक कर्तव्य है। वह एक निष्कारण धर्म है। स्वार्थ के लिए पुत्र का माता के प्रति प्रेम, पुत्र के अधःपतन को सूचित करता है।
गद्यांश: यह प्रणाम-भाव ही भूमि और जन का दृढ़ बन्धन है। इसी दृढ़ भित्ति पर राष्ट्र का भवन तैयार किया जाता है। इसी दृढ़ चट्टान पर राष्ट्र का चिर जीवन आश्रित रहता है। इसी मर्यादा को मानकर राष्ट्र के प्रति मनुष्यों के कर्तव्य और अधिकारों का उदय होता है। जो जन पृथ्वी के साथ माता और पुत्र के संबंध को स्वीकार करता है, उसे पृथ्वी के वरदानों में भाग पाने का अधिकार है। माता के प्रति अनुराग और सेवाभाव पुत्र का स्वाभाविक कर्तव्य है। वह एक निष्कारण धर्म है। स्वार्थ के लिए पुत्र का माता के प्रति प्रेम, पुत्र के अधःपतन को सूचित करता है।
गद्यांश: यह प्रणाम-भाव ही भूमि और जन का दृढ़ बन्धन है। इसी दृढ़ भित्ति पर राष्ट्र का भवन तैयार किया जाता है। इसी दृढ़ चट्टान पर राष्ट्र का चिर जीवन आश्रित रहता है। इसी मर्यादा को मानकर राष्ट्र के प्रति मनुष्यों के कर्तव्य और अधिकारों का उदय होता है। जो जन पृथ्वी के साथ माता और पुत्र के संबंध को स्वीकार करता है, उसे पृथ्वी के वरदानों में भाग पाने का अधिकार है। माता के प्रति अनुराग और सेवाभाव पुत्र का स्वाभाविक कर्तव्य है। वह एक निष्कारण धर्म है। स्वार्थ के लिए पुत्र का माता के प्रति प्रेम, पुत्र के अधःपतन को सूचित करता है।
गद्यांश: यह प्रणाम-भाव ही भूमि और जन का दृढ़ बन्धन है। इसी दृढ़ भित्ति पर राष्ट्र का भवन तैयार किया जाता है। इसी दृढ़ चट्टान पर राष्ट्र का चिर जीवन आश्रित रहता है। इसी मर्यादा को मानकर राष्ट्र के प्रति मनुष्यों के कर्तव्य और अधिकारों का उदय होता है। जो जन पृथ्वी के साथ माता और पुत्र के संबंध को स्वीकार करता है, उसे पृथ्वी के वरदानों में भाग पाने का अधिकार है। माता के प्रति अनुराग और सेवाभाव पुत्र का स्वाभाविक कर्तव्य है। वह एक निष्कारण धर्म है। स्वार्थ के लिए पुत्र का माता के प्रति प्रेम, पुत्र के अधःपतन को सूचित करता है।
गद्यांश: अशोक को जो सम्मान कालिदास से मिला, वह अपूर्व था। सुंदरियों के आसिंजनकारी नूपुरवाले चरणों के मृदु आघात से वह फूलता था, कोमल कपोलों पर कर्णावतंस के रूप में झूलता था और चंचल नील अलकों की अचंचल शोभा को सौ-गुना बढ़ा देता था। वह महादेव के मन में क्षोभ पैदा करता था, मर्यादा पुरुषोत्तम के चित्त में सीता का भ्रम पैदा करता था और मनोजन्मा देवता के एक इशारे पर कंधों पर से ही फूट उठता था।
गद्यांश: अशोक को जो सम्मान कालिदास से मिला, वह अपूर्व था। सुंदरियों के आसिंजनकारी नूपुरवाले चरणों के मृदु आघात से वह फूलता था, कोमल कपोलों पर कर्णावतंस के रूप में झूलता था और चंचल नील अलकों की अचंचल शोभा को सौ-गुना बढ़ा देता था। वह महादेव के मन में क्षोभ पैदा करता था, मर्यादा पुरुषोत्तम के चित्त में सीता का भ्रम पैदा करता था और मनोजन्मा देवता के एक इशारे पर कंधों पर से ही फूट उठता था।
गद्यांश: अशोक को जो सम्मान कालिदास से मिला, वह अपूर्व था। सुंदरियों के आसिंजनकारी नूपुरवाले चरणों के मृदु आघात से वह फूलता था, कोमल कपोलों पर कर्णावतंस के रूप में झूलता था और चंचल नील अलकों की अचंचल शोभा को सौ-गुना बढ़ा देता था। वह महादेव के मन में क्षोभ पैदा करता था, मर्यादा पुरुषोत्तम के चित्त में सीता का भ्रम पैदा करता था और मनोजन्मा देवता के एक इशारे पर कंधों पर से ही फूट उठता था।
गद्यांश: अशोक को जो सम्मान कालिदास से मिला, वह अपूर्व था। सुंदरियों के आसिंजनकारी नूपुरवाले चरणों के मृदु आघात से वह फूलता था, कोमल कपोलों पर कर्णावतंस के रूप में झूलता था और चंचल नील अलकों की अचंचल शोभा को सौ-गुना बढ़ा देता था। वह महादेव के मन में क्षोभ पैदा करता था, मर्यादा पुरुषोत्तम के चित्त में सीता का भ्रम पैदा करता था और मनोजन्मा देवता के एक इशारे पर कंधों पर से ही फूट उठता था।
गद्यांश: अशोक को जो सम्मान कालिदास से मिला, वह अपूर्व था। सुंदरियों के आसिंजनकारी नूपुरवाले चरणों के मृदु आघात से वह फूलता था, कोमल कपोलों पर कर्णावतंस के रूप में झूलता था और चंचल नील अलकों की अचंचल शोभा को सौ-गुना बढ़ा देता था। वह महादेव के मन में क्षोभ पैदा करता था, मर्यादा पुरुषोत्तम के चित्त में सीता का भ्रम पैदा करता था और मनोजन्मा देवता के एक इशारे पर कंधों पर से ही फूट उठता था।
पद्यांश: कहा आगंतुक ने सस्नेह-
'अरे तुम इतने हुए अधीर!
हार बैठे जीवन का दाँव
जीतते मरकर जिसको वीर।
तप नहीं केवल जीवन सत्य
करुण यह क्षणिक दीन अवसाद;
तरल आकांक्षा से है भरा
सो रहा आशा का आह्लाद।
पद्यांश: कहा आगंतुक ने सस्नेह-
'अरे तुम इतने हुए अधीर!
हार बैठे जीवन का दाँव
जीतते मरकर जिसको वीर।
तप नहीं केवल जीवन सत्य
करुण यह क्षणिक दीन अवसाद;
तरल आकांक्षा से है भरा
सो रहा आशा का आह्लाद।
पद्यांश: कहा आगंतुक ने सस्नेह-
'अरे तुम इतने हुए अधीर!
हार बैठे जीवन का दाँव
जीतते मरकर जिसको वीर।
तप नहीं केवल जीवन सत्य
करुण यह क्षणिक दीन अवसाद;
तरल आकांक्षा से है भरा
सो रहा आशा का आह्लाद।
पद्यांश: कहा आगंतुक ने सस्नेह-
'अरे तुम इतने हुए अधीर!
हार बैठे जीवन का दाँव
जीतते मरकर जिसको वीर।
तप नहीं केवल जीवन सत्य
करुण यह क्षणिक दीन अवसाद;
तरल आकांक्षा से है भरा
सो रहा आशा का आह्लाद।
पद्यांश: कहा आगंतुक ने सस्नेह-
'अरे तुम इतने हुए अधीर!
हार बैठे जीवन का दाँव
जीतते मरकर जिसको वीर।
तप नहीं केवल जीवन सत्य
करुण यह क्षणिक दीन अवसाद;
तरल आकांक्षा से है भरा
सो रहा आशा का आह्लाद।
पद्यांश: बाँध लेंगे क्या तुझे यह मोम के बंधन सजीले?
पंथ की बाधा बनेंगे तितलियों के पर रंगीले?
विश्व का क्रंदन भुला देगी मधुप की मधुर गुन-गुन,
क्या डुबा देंगे तुझे यह फूल के दल ओस-गीले?
तू न अपनी छाँह को अपने लिए कारा बनाना।
जाग तुझको दूर जाना।
पद्यांश: बाँध लेंगे क्या तुझे यह मोम के बंधन सजीले?
पंथ की बाधा बनेंगे तितलियों के पर रंगीले?
विश्व का क्रंदन भुला देगी मधुप की मधुर गुन-गुन,
क्या डुबा देंगे तुझे यह फूल के दल ओस-गीले?
तू न अपनी छाँह को अपने लिए कारा बनाना।
जाग तुझको दूर जाना।
पद्यांश: बाँध लेंगे क्या तुझे यह मोम के बंधन सजीले?
पंथ की बाधा बनेंगे तितलियों के पर रंगीले?
विश्व का क्रंदन भुला देगी मधुप की मधुर गुन-गुन,
क्या डुबा देंगे तुझे यह फूल के दल ओस-गीले?
तू न अपनी छाँह को अपने लिए कारा बनाना।
जाग तुझको दूर जाना।
पद्यांश: बाँध लेंगे क्या तुझे यह मोम के बंधन सजीले?
पंथ की बाधा बनेंगे तितलियों के पर रंगीले?
विश्व का क्रंदन भुला देगी मधुप की मधुर गुन-गुन,
क्या डुबा देंगे तुझे यह फूल के दल ओस-गीले?
तू न अपनी छाँह को अपने लिए कारा बनाना।
जाग तुझको दूर जाना।
पद्यांश: बाँध लेंगे क्या तुझे यह मोम के बंधन सजीले?
पंथ की बाधा बनेंगे तितलियों के पर रंगीले?
विश्व का क्रंदन भुला देगी मधुप की मधुर गुन-गुन,
क्या डुबा देंगे तुझे यह फूल के दल ओस-गीले?
तू न अपनी छाँह को अपने लिए कारा बनाना।
जाग तुझको दूर जाना।
निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द): प्रो० जी० सुंदर रेड्डी
निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द): कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'
निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द): हरिशंकर परसाई
निम्नलिखित में से किसी एक कवि का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख कृतियों का उल्लेख कीजिए (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द): सुमित्रानन्दन पन्त
निम्नलिखित में से किसी एक कवि का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख कृतियों का उल्लेख कीजिए (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द): मैथिलीशरण गुप्त
निम्नलिखित में से किसी एक कवि का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख कृतियों का उल्लेख कीजिए (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द): रामधारी सिंह 'दिनकर'
'ध्रुवयात्रा' कहानी के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)
'लाटी' कहानी का कथासार अपने शब्दों में लिखिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)
'मुक्तियज्ञ' खण्डकाव्य के नायक की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)
'मुक्तियज्ञ' खण्डकाव्य की कथावस्तु को संक्षेप में लिखिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)
'रश्मिरथी' खण्डकाव्य की कथावस्तु को अपने शब्दों में वर्णित कीजिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)
'रश्मिरथी' खण्डकाव्य के नायक का चरित्रांकन कीजिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)
'आलोकवृत्त' खण्डकाव्य की कथावस्तु लिखिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)
'आलोकवृत्त' खण्डकाव्य के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)
'त्यागपथी' खण्डकाव्य के नायक का चरित्रांकन कीजिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)
'त्यागपथी' खण्डकाव्य के किसी एक सर्ग की कथावस्तु लिखिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)
'श्रवणकुमार' खण्डकाव्य के नायक की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)
'श्रवणकुमार' खण्डकाव्य की कथावस्तु लिखिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)
'सत्य की जीत' खण्डकाव्य से सबसे प्रभावी व्यक्तित्व का चरित्रांकन कीजिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)
'सत्य की जीत' खण्डकाव्य की कथावस्तु अपने शब्दों में वर्णित कीजिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)
दिये गये संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिये:
संस्कृतसाहित्यस्य आदिकविः वाल्मीकिः, महर्षिव्यासः, कविकुलगुरुः कालिदासः अन्ये च भास-भारवि-भवभूत्यादयो महाकवयः स्वकीयैः ग्रन्थरत्नैः अद्यापि पाठकानां हृदि विराजन्ते । इयं भाषा अस्माभिः मातृसमं सम्माननीया वन्दनीया च यतो भारतमातुः स्वातन्त्र्यं गौरवम् अखण्डत्वं सांस्कृतिकमेकत्वञ्च संस्कृतेनैव सुरक्षितुं शक्यन्ते ।
दिये गये संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिये:
अतीते प्रथमकल्पे चतुष्पदाः सिंहं राजानमकुर्वन् । मत्स्या आनन्दमत्स्यं, शकुनयः सुवर्णहंसम् । तस्य पुनः सुवर्णराजहंसस्य दुहिता हंसपोतिका अतीव रूपवती आसीत् । स तस्यै वरमदात् यत् सा आत्मनश्चित्तरुचितं स्वामिनं वृणुयात् इति । हंसराजः तस्यै वरं दत्त्वा हिमवति शकुनिसङ्घं समन्यपतत् । नानाप्रकाराः हंसमयूरादयः शकुनिगणाः समागत्य एकस्मिन् महति पाषाणतले संन्यपतन् । हंसराजः आत्मनः चित्तरुचितं स्वामिकम् आगत्य वृणुयात् इति दुहितरमादिदेश ।
दिये गये श्लोकों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
विद्या विवादाय धनं मदाय शक्तिः परेषां परिपीडनाय ।
खलस्य साधोः विपरीतमेतज्ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय ॥
दिये गये श्लोकों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
जयन्ति ते महाभागाः जन-सेवा-परायणाः ।
जरामृत्युभयं नास्ति येषां कीर्तितनोः क्वचित् ॥
निम्नलिखित मुहावरों एवं लोकोक्तियों में से किसी एक का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए: अंग-अंग ढीला होना
निम्नलिखित मुहावरों एवं लोकोक्तियों में से किसी एक का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए: जमीन आसमान एक करना
निम्नलिखित मुहावरों एवं लोकोक्तियों में से किसी एक का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए: अधजल गगरी छलकत जाय
निम्नलिखित मुहावरों एवं लोकोक्तियों में से किसी एक का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए: अपनी-अपनी डफली अपना-अपना राग
अपठित गद्यांश: वस्तुतः बोली, गोली से अधिक असरदार होती है। हम शब्दों द्वारा ही औरों को अपना बनाते हैं और शब्दों में ही अपने पराए बन जाते हैं। कौन-सा शब्द कब, कहाँ, किसके लिए बोलना है इसका ध्यान रखना ही औचित्य है और भाषा का यह औचित्य शब्द सौंदर्य का अहम हिस्सा है। सच तो यह है कि शब्दों का दुरुपयोग प्रायः होता है और इस दुरुपयोग को रोकने का उपाय शब्दों का सदुपयोग ही है। विशेषणों के प्रयोग में हम प्रायः अति उत्साहवश या अज्ञानवश उनका दुरुपयोग करते हैं, ऐसे निरर्थक प्रयोग करते हैं कि स्थिति हास्यास्पद हो जाती है।
अपठित गद्यांश: वस्तुतः बोली, गोली से अधिक असरदार होती है। हम शब्दों द्वारा ही औरों को अपना बनाते हैं और शब्दों में ही अपने पराए बन जाते हैं। कौन-सा शब्द कब, कहाँ, किसके लिए बोलना है इसका ध्यान रखना ही औचित्य है और भाषा का यह औचित्य शब्द सौंदर्य का अहम हिस्सा है। सच तो यह है कि शब्दों का दुरुपयोग प्रायः होता है और इस दुरुपयोग को रोकने का उपाय शब्दों का सदुपयोग ही है। विशेषणों के प्रयोग में हम प्रायः अति उत्साहवश या अज्ञानवश उनका दुरुपयोग करते हैं, ऐसे निरर्थक प्रयोग करते हैं कि स्थिति हास्यास्पद हो जाती है।
अपठित गद्यांश: वस्तुतः बोली, गोली से अधिक असरदार होती है। हम शब्दों द्वारा ही औरों को अपना बनाते हैं और शब्दों में ही अपने पराए बन जाते हैं। कौन-सा शब्द कब, कहाँ, किसके लिए बोलना है इसका ध्यान रखना ही औचित्य है और भाषा का यह औचित्य शब्द सौंदर्य का अहम हिस्सा है। सच तो यह है कि शब्दों का दुरुपयोग प्रायः होता है और इस दुरुपयोग को रोकने का उपाय शब्दों का सदुपयोग ही है। विशेषणों के प्रयोग में हम प्रायः अति उत्साहवश या अज्ञानवश उनका दुरुपयोग करते हैं, ऐसे निरर्थक प्रयोग करते हैं कि स्थिति हास्यास्पद हो जाती है।
अपठित गद्यांश: कोई अपने दुर्भाग्य को कोस रहा है, कोई अपनी पारिवारिक दीनता को दोषी बता रहा है, कोई मार्गदर्शक के अभाव को अपनी असफलता का आधार मान रहा है - बहुत से असफल व्यक्ति इसी तरह अनेक कारणों को असफलता का आधार मानते हैं, विभिन्न कारणों की कल्पना कर हाथ-पर-हाथ धरे बैठे रहते हैं। वे अपने आप में कुछ कर नहीं पाते। वे समाज के लिए, संसार के लिए कुछ नहीं कर पाते। ऐसे मनुष्य को जीवन में कोई राह नहीं मिलती, कोई चारा नहीं दिखता। वे दूसरों से अपेक्षा करते हैं कि कोई उन्हें किसी लक्ष्य प्राप्ति का मार्ग दिखाए, सफलता की सीढ़ी बताए, जिससे वे उस पर आसानी से चढ़ सकें। किन्तु ऐसे लोगों को यह भली-भाँति जानना चाहिए कि जहाँ चाह है, वहीं राह है। हमारी इच्छाशक्ति स्वयं हमारे लिए मार्ग बना देती है।
अपठित गद्यांश: कोई अपने दुर्भाग्य को कोस रहा है, कोई अपनी पारिवारिक दीनता को दोषी बता रहा है, कोई मार्गदर्शक के अभाव को अपनी असफलता का आधार मान रहा है - बहुत से असफल व्यक्ति इसी तरह अनेक कारणों को असफलता का आधार मानते हैं, विभिन्न कारणों की कल्पना कर हाथ-पर-हाथ धरे बैठे रहते हैं। वे अपने आप में कुछ कर नहीं पाते। वे समाज के लिए, संसार के लिए कुछ नहीं कर पाते। ऐसे मनुष्य को जीवन में कोई राह नहीं मिलती, कोई चारा नहीं दिखता। वे दूसरों से अपेक्षा करते हैं कि कोई उन्हें किसी लक्ष्य प्राप्ति का मार्ग दिखाए, सफलता की सीढ़ी बताए, जिससे वे उस पर आसानी से चढ़ सकें। किन्तु ऐसे लोगों को यह भली-भाँति जानना चाहिए कि जहाँ चाह है, वहीं राह है। हमारी इच्छाशक्ति स्वयं हमारे लिए मार्ग बना देती है।
अपठित गद्यांश: कोई अपने दुर्भाग्य को कोस रहा है, कोई अपनी पारिवारिक दीनता को दोषी बता रहा है, कोई मार्गदर्शक के अभाव को अपनी असफलता का आधार मान रहा है - बहुत से असफल व्यक्ति इसी तरह अनेक कारणों को असफलता का आधार मानते हैं, विभिन्न कारणों की कल्पना कर हाथ-पर-हाथ धरे बैठे रहते हैं। वे अपने आप में कुछ कर नहीं पाते। वे समाज के लिए, संसार के लिए कुछ नहीं कर पाते। ऐसे मनुष्य को जीवन में कोई राह नहीं मिलती, कोई चारा नहीं दिखता। वे दूसरों से अपेक्षा करते हैं कि कोई उन्हें किसी लक्ष्य प्राप्ति का मार्ग दिखाए, सफलता की सीढ़ी बताए, जिससे वे उस पर आसानी से चढ़ सकें। किन्तु ऐसे लोगों को यह भली-भाँति जानना चाहिए कि जहाँ चाह है, वहीं राह है। हमारी इच्छाशक्ति स्वयं हमारे लिए मार्ग बना देती है।
निम्नलिखित शब्द-युग्मों का सही अर्थ चयन करके लिखिए: अनिल-अनल -
निम्नलिखित शब्द-युग्मों का सही अर्थ चयन करके लिखिए: ग्रह-गृह -
निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द के दो सही अर्थ लिखिए: अंबुज
निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द के दो सही अर्थ लिखिए: पक्ष
निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द के दो सही अर्थ लिखिए: मेघ
निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द के दो सही अर्थ लिखिए: अरुण
निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक सही शब्द का चयन करके लिखिए: कम बोलने वाला -
निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक सही शब्द का चयन करके लिखिए: जो बूढ़ा न हो -
निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए: शिक्षक ने छात्र की प्रशंसा की।
निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए: राजा दिलीप बहुत दयालू था।
निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए: राजा घोड़े में सवार हो गया।
निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए: यह बात शीला को पूछो।
'करुण' रस अथवा 'शृंगार' रस की परिभाषा देते हुए एक उदाहरण लिखिए।
'अनुप्रास' अलंकार अथवा 'संदेह' अलंकार का लक्षण और उदाहरण लिखिए।
'सोरठा' छन्द अथवा 'कुंडलिया' छन्द का लक्षण और एक उदाहरण लिखिए।
अपने मुहल्ले की समुचित सफाई हेतु नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी को एक पत्र लिखिए।
स्व-रोजगार हेतु ऋण की माँग करते हुए बैंक के शाखा-प्रबन्धक को एक आवेदन-पत्र लिखिए।
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए: युवाओं के निर्माण में पुस्तकालय का महत्त्व
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए: परोपकार-सर्वोच्च भावना
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए: भारत की वैज्ञानिक प्रगति
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए: इण्टरनेट की शैक्षिक उपयोगिता
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए: नारी-जीवन का सामाजिक स्वरूप
UP Board Class 12 General Hindi 2026 Exam Pattern and Marking Scheme Explained
The Set 302 BI paper is written in Hindi and is split into two sections of 50 marks each. Every question is compulsory, but most of them carry an internal choice.
- Total questions: 14 questions in two sections - Khand Ka (Q1 to Q7) and Khand Kha (Q8 to Q14)
- Total marks: 100 - 50 marks in each section
- Duration: 3 hours 15 minutes, with the first 15 minutes given for reading the question paper
- Khand Ka (50 marks): 10 MCQs (Q1 and Q2), a prose and a poetry passage with 5 questions each (Q3 and Q4, 10 marks each), literary biography of a writer and a poet (Q5, 5 + 5 marks), a story question (Q6, 5 marks) and a khandkavya question (Q7, 5 marks)
- Khand Kha (50 marks): Sanskrit passage and shloka translation (Q8, 7 + 7 marks), idiom or proverb (Q9, 2 marks), unseen passage (Q10, 5 marks), word knowledge (Q11, 8 marks), rasa, alankar and chhand (Q12, 6 marks), letter writing (Q13, 6 marks) and essay (Q14, 9 marks)
- Word limits: literary biography, story and khandkavya answers are capped at 80 words
High-Weightage Sections in UP Board Class 12 General Hindi 2026 to Focus On First
Passage-based answers and the writing questions decided most of the marks in Set 302 BI.
- Prose and poetry passages (Q3 and Q4): 20 of 100 marks - the prose passages came from Rashtra ka Swaroop (Vasudevsharan Agrawal) and Ashok ke Phool (Hazariprasad Dwivedi), and the poetry passages from Kamayani 'Shraddha' (Jaishankar Prasad) and 'Jaag Tujhko Door Jaana' (Mahadevi Verma)
- Sanskrit translation (Q8): 14 of 100 marks - one Sanskrit prose passage and one shloka, each with 2 marks for the reference and 5 marks for the Hindi translation
- Writing skills (Q13 and Q14): 15 of 100 marks - a 6-mark letter and a 9-mark essay; the essay topics were युवाओं के निर्माण में पुस्तकालय का महत्त्व; परोपकार-सर्वोच्च भावना; भारत की वैज्ञानिक प्रगति; इण्टरनेट की शैक्षिक उपयोगिता; नारी-जीवन का सामाजिक स्वरूप
- MCQs on Hindi literature (Q1 and Q2): 10 of 100 marks - authors, works, literary periods and journals
- Biographies, story and khandkavya (Q5 to Q7): 20 of 100 marks - writer and poet profiles, one story question and one khandkavya question
How to Use the UP Board General Hindi Question Paper for Practice
Treat this Set 302 BI paper as a timed mock before you check the solutions.
- Attempt all 14 questions in 3 hours 15 minutes under exam conditions first
- Practise both options of the choice questions, not just the one you would normally pick
- Keep to the 80-word limit for the biography, story and khandkavya answers
- Write the Sanskrit translations with the reference first, since each carries 2 of its 7 marks
- Review each answer against the step-by-step solution PDF, not just the final answer
UP Board Class 12 General Hindi 2026 Question Paper FAQs
Ques. When was the UP Board Class 12 General Hindi 2026 exam conducted?
Ans. UPMSP conducted the UP Board Class 12 General Hindi 2026 exam on February 18, 2026, in the morning shift from 8:30 am to 11:45 am, during the intermediate exams that ran from February 18 to March 12, 2026. The official time table is on upmsp.edu.in.
Ques. How many questions are there in the UP Board Class 12 General Hindi 2026 paper, and is there any choice?
Ans. The paper has 14 questions worth 100 marks, and all are compulsory. Most of them offer an internal choice, such as an OR passage in Q3 and Q4, one of three authors or poets in Q5, one khandkavya out of six in Q7 and one of five essay topics in Q14.
Ques. What is the marking scheme for UP Board Class 12 General Hindi 2026?
Ans. Q1 and Q2 are MCQs of 1 mark each, Q3 and Q4 carry 10 marks each, Q5 carries 10 marks, Q6 and Q7 carry 5 marks each, Q8 carries 14 marks, Q9 carries 2 marks, Q10 carries 5 marks, Q11 carries 8 marks, Q12 and Q13 carry 6 marks each and Q14 carries 9 marks, for a total of 100 marks in 3 hours 15 minutes.
Ques. Which questions carried the highest weightage in UP Board Class 12 General Hindi 2026 Set 302 BI?
Ans. The two passage questions (Q3 and Q4) carried 20 marks, the Sanskrit translation (Q8) carried 14 marks and the letter and essay (Q13 and Q14) carried 15 marks together.
Ques. Where can I download the UP Board Class 12 General Hindi 2026 Set 302 BI question paper with solutions PDF for free?
Ans. You can download both the question paper and the full step-by-step solutions PDF for Set 302 BI from the table at the top of this page, for free.








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