The UP Board Class 12 General Hindi (Samanya Hindi) question paper with solutions (Set 302 BN) is available here for free download. UP Board Class 12 General Hindi 2026 was conducted by the Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Parishad (UPMSP) on February 18, 2026, as a 100-mark paper of 14 compulsory questions to be solved in 3 hours 15 minutes.

UP Board Class 12 General Hindi 2026 Question Paper with Solutions (Set 302 BN) Download PDF Check Solutions

UP Board Class 12 General Hindi 2026 (Set 302 BN) Questions with Solutions

Question 1:

'पतितों के देश में' रचना है:

  • (A) राहुल सांकृत्यायन की
  • (B) रामवृक्ष बेनीपुरी की
  • (C) हजारी प्रसाद द्विवेदी की
  • (D) कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' की

Question 2:

संपूर्णानन्द द्वारा सम्पादित पत्रिका है:

  • (A) 'धर्मयुग'
  • (B) 'हंस'
  • (C) 'सरस्वती'
  • (D) 'मर्यादा'

Question 3:

'भाग्यवती' उपन्यास के लेखक हैं:

  • (A) मुंशी प्रेमचन्द
  • (B) अमृतलाल नागर
  • (C) श्रद्धाराम फुल्लौरी
  • (D) रामप्रसाद निरंजनी

Question 4:

हजारी प्रसाद द्विवेदी 'पद्मभूषण' उपाधि से सम्मानित हुए:

  • (A) 1963 में
  • (B) 1959 में
  • (C) 1957 में
  • (D) 1950 में

Question 5:

निम्नलिखित साहित्यकारों में नाटककार हैं:

  • (A) रामचन्द्र शुक्ल
  • (B) डॉ. नगेन्द्र
  • (C) मोहन राकेश
  • (D) महादेवी वर्मा

Question 6:

मैथिलीशरण द्वारा रचित कृति है:

  • (A) 'रसकलश'
  • (B) 'दानलीला'
  • (C) 'प्रदक्षिणा'
  • (D) 'अतिमा'

Question 7:

'रामधारी सिंह दिनकर' की रचना है:

  • (A) 'पृथिवीपुत्र'
  • (B) 'स्वर्ण किरण'
  • (C) 'परशुराम की प्रतीक्षा'
  • (D) 'ऐसा कोई घर आपने देखा है'

Question 8:

'छायावाद' की विशेषता है:

  • (A) इतिवृत्तात्मकता
  • (B) सौन्दर्य एवं प्रेम
  • (C) शृंगारिक भावना
  • (D) उपदेशात्मक वृत्ति

Question 9:

'छायावाद' युग में लिखी गई रचना है:

  • (A) 'प्रेम माधुरी'
  • (B) 'उद्धवशतक'
  • (C) 'चित्राधार'
  • (D) 'सूरसारावली'

Question 10:

महाकवि भूषण की रचना है:

  • (A) 'चिदम्बरा'
  • (B) 'यामा'
  • (C) 'छत्रसाल दशक'
  • (D) 'दीपशिखा'

Question 11:

गद्यांश: पृथ्वी और आकाश के अन्तराल में जो कुछ सामग्री भरी है, पृथ्वी के चारों ओर फैले हुए गम्भीर सागर में जो जलचर एवं रत्नों की राशियाँ हैं, उन सबके प्रति चेतना और स्वागत के नये भाव राष्ट्र में फैलने चाहिए। राष्ट्र के नवयुवकों के हृदय में उन सबके प्रति जिज्ञासा की नयी किरणें जब तक नहीं फूटतीं तब तक हम सोए हुए के समान हैं।
विज्ञान और उद्यम दोनों को मिलाकर राष्ट्र के भौतिक स्वरूप का एक नया ठाट खड़ा करना है। यह कार्य प्रसन्नता, उत्साह और अधक परिश्रम द्वारा नित्य आगे बढ़ाना चाहिए। हमारा यह ध्येय हो कि राष्ट्र में जितने हाथ है, उनमें से कोई भी इस कार्य में भाग लिये बिना रीता न रहे।

(i) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।


Question 12:

गद्यांश: पृथ्वी और आकाश के अन्तराल में जो कुछ सामग्री भरी है, पृथ्वी के चारों ओर फैले हुए गम्भीर सागर में जो जलचर एवं रत्नों की राशियाँ हैं, उन सबके प्रति चेतना और स्वागत के नये भाव राष्ट्र में फैलने चाहिए। राष्ट्र के नवयुवकों के हृदय में उन सबके प्रति जिज्ञासा की नयी किरणें जब तक नहीं फूटतीं तब तक हम सोए हुए के समान हैं।
विज्ञान और उद्यम दोनों को मिलाकर राष्ट्र के भौतिक स्वरूप का एक नया ठाट खड़ा करना है। यह कार्य प्रसन्नता, उत्साह और अधक परिश्रम द्वारा नित्य आगे बढ़ाना चाहिए। हमारा यह ध्येय हो कि राष्ट्र में जितने हाथ है, उनमें से कोई भी इस कार्य में भाग लिये बिना रीता न रहे।

(ii) रेखांकित अंशों की व्याख्या कीजिए।


Question 13:

गद्यांश: पृथ्वी और आकाश के अन्तराल में जो कुछ सामग्री भरी है, पृथ्वी के चारों ओर फैले हुए गम्भीर सागर में जो जलचर एवं रत्नों की राशियाँ हैं, उन सबके प्रति चेतना और स्वागत के नये भाव राष्ट्र में फैलने चाहिए। राष्ट्र के नवयुवकों के हृदय में उन सबके प्रति जिज्ञासा की नयी किरणें जब तक नहीं फूटतीं तब तक हम सोए हुए के समान हैं।
विज्ञान और उद्यम दोनों को मिलाकर राष्ट्र के भौतिक स्वरूप का एक नया ठाट खड़ा करना है। यह कार्य प्रसन्नता, उत्साह और अधक परिश्रम द्वारा नित्य आगे बढ़ाना चाहिए। हमारा यह ध्येय हो कि राष्ट्र में जितने हाथ है, उनमें से कोई भी इस कार्य में भाग लिये बिना रीता न रहे।

(iii) राष्ट्रीय चेतना में भौतिक ज्ञान - विज्ञान के महत्त्व को रेखांकित कीजिए।


Question 14:

गद्यांश: पृथ्वी और आकाश के अन्तराल में जो कुछ सामग्री भरी है, पृथ्वी के चारों ओर फैले हुए गम्भीर सागर में जो जलचर एवं रत्नों की राशियाँ हैं, उन सबके प्रति चेतना और स्वागत के नये भाव राष्ट्र में फैलने चाहिए। राष्ट्र के नवयुवकों के हृदय में उन सबके प्रति जिज्ञासा की नयी किरणें जब तक नहीं फूटतीं तब तक हम सोए हुए के समान हैं।
विज्ञान और उद्यम दोनों को मिलाकर राष्ट्र के भौतिक स्वरूप का एक नया ठाट खड़ा करना है। यह कार्य प्रसन्नता, उत्साह और अधक परिश्रम द्वारा नित्य आगे बढ़ाना चाहिए। हमारा यह ध्येय हो कि राष्ट्र में जितने हाथ है, उनमें से कोई भी इस कार्य में भाग लिये बिना रीता न रहे।

(iv) लेखक ने राष्ट्र की सुप्त अवस्था कब तक स्वीकार की है?


Question 15:

गद्यांश: पृथ्वी और आकाश के अन्तराल में जो कुछ सामग्री भरी है, पृथ्वी के चारों ओर फैले हुए गम्भीर सागर में जो जलचर एवं रत्नों की राशियाँ हैं, उन सबके प्रति चेतना और स्वागत के नये भाव राष्ट्र में फैलने चाहिए। राष्ट्र के नवयुवकों के हृदय में उन सबके प्रति जिज्ञासा की नयी किरणें जब तक नहीं फूटतीं तब तक हम सोए हुए के समान हैं।
विज्ञान और उद्यम दोनों को मिलाकर राष्ट्र के भौतिक स्वरूप का एक नया ठाट खड़ा करना है। यह कार्य प्रसन्नता, उत्साह और अधक परिश्रम द्वारा नित्य आगे बढ़ाना चाहिए। हमारा यह ध्येय हो कि राष्ट्र में जितने हाथ है, उनमें से कोई भी इस कार्य में भाग लिये बिना रीता न रहे।

(v) विज्ञान और श्रम के संयोग से राष्ट्र प्रगति के पथ पर कैसे अग्रसर हो सकता है?


Question 16:

गद्यांश: ईर्ष्या द्वेष से प्रेरित निंदा भी होती है, लेकिन इसमें वह मजा नहीं जो मिशनरी भाव से निंदा करने में आता है। इस प्रकार का निंदक बड़ा दुखी होता है। ईर्ष्या द्वेष से चौबीसों घंटे जलता है, और निंदा का जल छिड़क कर कुछ शान्ति अनुभव करता है। ऐसा निंदक बड़ा दयनीय होता है। अपनी अक्षमता से पीड़ित वह बेचारा दूसरे की सक्षमता के चांद को देखकर सारी रात श्वान जैसा भौंकता है। ईर्ष्या द्वेष से प्रेरित निंदा करनेवाले को कोई दंड देने की जरूरत नहीं है, वह निंदक बेचारा स्वयं दंडित होता है। आप चैन से सोइये और वह जलन के कारण सो नहीं पाता। उसे और क्या दण्ड चाहिए? निरन्तर अच्छे काम करते जाने से उसका दंड भी सख्त होता जाता है। जैसे एक कवि ने अच्छी कविता लिखी, ईर्ष्याग्रस्त निंदक को कष्ट होगा। अब अगर एक और अच्छी लिख दी, तो उसका कष्ट दुगुना हो जाएगा।

(i) उपर्युक्त गद्यांश के लेखक और पाठ का नाम लिखिए।


Question 17:

गद्यांश: ईर्ष्या द्वेष से प्रेरित निंदा भी होती है, लेकिन इसमें वह मजा नहीं जो मिशनरी भाव से निंदा करने में आता है। इस प्रकार का निंदक बड़ा दुखी होता है। ईर्ष्या द्वेष से चौबीसों घंटे जलता है, और निंदा का जल छिड़क कर कुछ शान्ति अनुभव करता है। ऐसा निंदक बड़ा दयनीय होता है। अपनी अक्षमता से पीड़ित वह बेचारा दूसरे की सक्षमता के चांद को देखकर सारी रात श्वान जैसा भौंकता है। ईर्ष्या द्वेष से प्रेरित निंदा करनेवाले को कोई दंड देने की जरूरत नहीं है, वह निंदक बेचारा स्वयं दंडित होता है। आप चैन से सोइये और वह जलन के कारण सो नहीं पाता। उसे और क्या दण्ड चाहिए? निरन्तर अच्छे काम करते जाने से उसका दंड भी सख्त होता जाता है। जैसे एक कवि ने अच्छी कविता लिखी, ईर्ष्याग्रस्त निंदक को कष्ट होगा। अब अगर एक और अच्छी लिख दी, तो उसका कष्ट दुगुना हो जाएगा।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।


Question 18:

गद्यांश: ईर्ष्या द्वेष से प्रेरित निंदा भी होती है, लेकिन इसमें वह मजा नहीं जो मिशनरी भाव से निंदा करने में आता है। इस प्रकार का निंदक बड़ा दुखी होता है। ईर्ष्या द्वेष से चौबीसों घंटे जलता है, और निंदा का जल छिड़क कर कुछ शान्ति अनुभव करता है। ऐसा निंदक बड़ा दयनीय होता है। अपनी अक्षमता से पीड़ित वह बेचारा दूसरे की सक्षमता के चांद को देखकर सारी रात श्वान जैसा भौंकता है। ईर्ष्या द्वेष से प्रेरित निंदा करनेवाले को कोई दंड देने की जरूरत नहीं है, वह निंदक बेचारा स्वयं दंडित होता है। आप चैन से सोइये और वह जलन के कारण सो नहीं पाता। उसे और क्या दण्ड चाहिए? निरन्तर अच्छे काम करते जाने से उसका दंड भी सख्त होता जाता है। जैसे एक कवि ने अच्छी कविता लिखी, ईर्ष्याग्रस्त निंदक को कष्ट होगा। अब अगर एक और अच्छी लिख दी, तो उसका कष्ट दुगुना हो जाएगा।

(iii) निंदा कितने प्रकार की होती है?


Question 19:

गद्यांश: ईर्ष्या द्वेष से प्रेरित निंदा भी होती है, लेकिन इसमें वह मजा नहीं जो मिशनरी भाव से निंदा करने में आता है। इस प्रकार का निंदक बड़ा दुखी होता है। ईर्ष्या द्वेष से चौबीसों घंटे जलता है, और निंदा का जल छिड़क कर कुछ शान्ति अनुभव करता है। ऐसा निंदक बड़ा दयनीय होता है। अपनी अक्षमता से पीड़ित वह बेचारा दूसरे की सक्षमता के चांद को देखकर सारी रात श्वान जैसा भौंकता है। ईर्ष्या द्वेष से प्रेरित निंदा करनेवाले को कोई दंड देने की जरूरत नहीं है, वह निंदक बेचारा स्वयं दंडित होता है। आप चैन से सोइये और वह जलन के कारण सो नहीं पाता। उसे और क्या दण्ड चाहिए? निरन्तर अच्छे काम करते जाने से उसका दंड भी सख्त होता जाता है। जैसे एक कवि ने अच्छी कविता लिखी, ईर्ष्याग्रस्त निंदक को कष्ट होगा। अब अगर एक और अच्छी लिख दी, तो उसका कष्ट दुगुना हो जाएगा।

(iv) मिशनरी भाव से निंदा करने से क्या मिलता है?


Question 20:

गद्यांश: ईर्ष्या द्वेष से प्रेरित निंदा भी होती है, लेकिन इसमें वह मजा नहीं जो मिशनरी भाव से निंदा करने में आता है। इस प्रकार का निंदक बड़ा दुखी होता है। ईर्ष्या द्वेष से चौबीसों घंटे जलता है, और निंदा का जल छिड़क कर कुछ शान्ति अनुभव करता है। ऐसा निंदक बड़ा दयनीय होता है। अपनी अक्षमता से पीड़ित वह बेचारा दूसरे की सक्षमता के चांद को देखकर सारी रात श्वान जैसा भौंकता है। ईर्ष्या द्वेष से प्रेरित निंदा करनेवाले को कोई दंड देने की जरूरत नहीं है, वह निंदक बेचारा स्वयं दंडित होता है। आप चैन से सोइये और वह जलन के कारण सो नहीं पाता। उसे और क्या दण्ड चाहिए? निरन्तर अच्छे काम करते जाने से उसका दंड भी सख्त होता जाता है। जैसे एक कवि ने अच्छी कविता लिखी, ईर्ष्याग्रस्त निंदक को कष्ट होगा। अब अगर एक और अच्छी लिख दी, तो उसका कष्ट दुगुना हो जाएगा।

(v) ईर्ष्या द्वेष से प्रेरित निंदक किस कारण सो नहीं पाता?


Question 21:

पद्यांश: ज्यों ज्यों लगती नाव पार
उर में आलोकित शत विचार!
इस धरा सा ही जग का क्रम
शाश्वत इस जीवन का उद्गम
शाश्वत है गति, शाश्वत संगम
शाश्वत नभ का नीला विकास,
शाश्वत शशि का यह रजत हास,
शाश्वत लघु लहरों का विलास
हे जगजीवन के कर्णधार!
चिर जन्म मरण के आर-पार,
शाश्वत जीवन नौका विहार।
मैं भूल गया अस्तित्व ज्ञान,
जीवन का यह शाश्वत प्रमाण
करता मुझको अमरत्व दान!

(i) उपर्युक्त पद्यांश के कवि एवं पद्यांश का नाम लिखिए।


Question 22:

पद्यांश: ज्यों ज्यों लगती नाव पार
उर में आलोकित शत विचार!
इस धरा सा ही जग का क्रम
शाश्वत इस जीवन का उद्गम
शाश्वत है गति, शाश्वत संगम
शाश्वत नभ का नीला विकास,
शाश्वत शशि का यह रजत हास,
शाश्वत लघु लहरों का विलास
हे जगजीवन के कर्णधार!
चिर जन्म मरण के आर-पार,
शाश्वत जीवन नौका विहार।
मैं भूल गया अस्तित्व ज्ञान,
जीवन का यह शाश्वत प्रमाण
करता मुझको अमरत्व दान!

(ii) जग का क्रम किस प्रकार का है?


Question 23:

पद्यांश: ज्यों ज्यों लगती नाव पार
उर में आलोकित शत विचार!
इस धरा सा ही जग का क्रम
शाश्वत इस जीवन का उद्गम
शाश्वत है गति, शाश्वत संगम
शाश्वत नभ का नीला विकास,
शाश्वत शशि का यह रजत हास,
शाश्वत लघु लहरों का विलास
हे जगजीवन के कर्णधार!
चिर जन्म मरण के आर-पार,
शाश्वत जीवन नौका विहार।
मैं भूल गया अस्तित्व ज्ञान,
जीवन का यह शाश्वत प्रमाण
करता मुझको अमरत्व दान!

(iii) किन-किन तथ्यों को शाश्वत बताया गया है?


Question 24:

पद्यांश: ज्यों ज्यों लगती नाव पार
उर में आलोकित शत विचार!
इस धरा सा ही जग का क्रम
शाश्वत इस जीवन का उद्गम
शाश्वत है गति, शाश्वत संगम
शाश्वत नभ का नीला विकास,
शाश्वत शशि का यह रजत हास,
शाश्वत लघु लहरों का विलास
हे जगजीवन के कर्णधार!
चिर जन्म मरण के आर-पार,
शाश्वत जीवन नौका विहार।
मैं भूल गया अस्तित्व ज्ञान,
जीवन का यह शाश्वत प्रमाण
करता मुझको अमरत्व दान!

(iv) रजत हास और कर्णधार का क्या अर्थ है?


Question 25:

पद्यांश: ज्यों ज्यों लगती नाव पार
उर में आलोकित शत विचार!
इस धरा सा ही जग का क्रम
शाश्वत इस जीवन का उद्गम
शाश्वत है गति, शाश्वत संगम
शाश्वत नभ का नीला विकास,
शाश्वत शशि का यह रजत हास,
शाश्वत लघु लहरों का विलास
हे जगजीवन के कर्णधार!
चिर जन्म मरण के आर-पार,
शाश्वत जीवन नौका विहार।
मैं भूल गया अस्तित्व ज्ञान,
जीवन का यह शाश्वत प्रमाण
करता मुझको अमरत्व दान!

(v) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।


Question 26:

पद्यांश: अलसता की सी लता
किंतु कोमलता की वह कली
सखी नीरवता के कंधे पर डाले बाँह
छाँह-सी अम्बर पथ से चली
नहीं बजती उसके हाथों में कोई वीणा,
नहीं होता कोई अनुराग-राग-आलाप,
नूपुरों में भी रुन झुन रुन झुन रुन झुन नहीं
सिर्फ एक अव्यक्त शब्द सा 'चुप-चुप-चुप'
है गूँज रहा सब कहीं।

(i) उपर्युक्त पद्यांश के कवि एवं पद्यांश का नाम लिखिए।


Question 27:

पद्यांश: अलसता की सी लता
किंतु कोमलता की वह कली
सखी नीरवता के कंधे पर डाले बाँह
छाँह-सी अम्बर पथ से चली
नहीं बजती उसके हाथों में कोई वीणा,
नहीं होता कोई अनुराग-राग-आलाप,
नूपुरों में भी रुन झुन रुन झुन रुन झुन नहीं
सिर्फ एक अव्यक्त शब्द सा 'चुप-चुप-चुप'
है गूँज रहा सब कहीं।

(ii) कवि ने संध्या को किस रूप में चित्रित किया है?


Question 28:

पद्यांश: अलसता की सी लता
किंतु कोमलता की वह कली
सखी नीरवता के कंधे पर डाले बाँह
छाँह-सी अम्बर पथ से चली
नहीं बजती उसके हाथों में कोई वीणा,
नहीं होता कोई अनुराग-राग-आलाप,
नूपुरों में भी रुन झुन रुन झुन रुन झुन नहीं
सिर्फ एक अव्यक्त शब्द सा 'चुप-चुप-चुप'
है गूँज रहा सब कहीं।

(iii) अलसता की लता किसको कहा गया है?


Question 29:

पद्यांश: अलसता की सी लता
किंतु कोमलता की वह कली
सखी नीरवता के कंधे पर डाले बाँह
छाँह-सी अम्बर पथ से चली
नहीं बजती उसके हाथों में कोई वीणा,
नहीं होता कोई अनुराग-राग-आलाप,
नूपुरों में भी रुन झुन रुन झुन रुन झुन नहीं
सिर्फ एक अव्यक्त शब्द सा 'चुप-चुप-चुप'
है गूँज रहा सब कहीं।

(iv) अव्यक्त शब्द का अर्थ और विलोम शब्द लिखिए।


Question 30:

पद्यांश: अलसता की सी लता
किंतु कोमलता की वह कली
सखी नीरवता के कंधे पर डाले बाँह
छाँह-सी अम्बर पथ से चली
नहीं बजती उसके हाथों में कोई वीणा,
नहीं होता कोई अनुराग-राग-आलाप,
नूपुरों में भी रुन झुन रुन झुन रुन झुन नहीं
सिर्फ एक अव्यक्त शब्द सा 'चुप-चुप-चुप'
है गूँज रहा सब कहीं।

(v) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।


Question 31:

निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए (अधिकतम 80 शब्द): वासुदेव शरण अग्रवाल


Question 32:

निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए (अधिकतम 80 शब्द): हजारी प्रसाद द्विवेदी


Question 33:

निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए (अधिकतम 80 शब्द): प्रो. जी. सुन्दर रेड्डी


Question 34:

निम्नलिखित में से किसी एक कवि का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए: अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'


Question 35:

निम्नलिखित में से किसी एक कवि का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए: मैथिलीशरण गुप्त


Question 36:

निम्नलिखित में से किसी एक कवि का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए: जयशंकर प्रसाद


Question 37:

'बहादुर' कहानी का सारांश अपनी भाषा में लिखिए। (अधिकतम शब्द सीमा 80 शब्द)


Question 38:

'पंचलाइट' कहानी के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए।


Question 39:

'मुक्तियज्ञ' खण्ड काव्य की संक्षिप्त कथा अपने शब्दों में लिखिए।


Question 40:

'मुक्तियज्ञ' के नायक गाँधीजी का चरित्र-चित्रण कीजिए।


Question 41:

'सत्य की जीत' खण्डकाव्य के आधार पर दुःशासन का चरित्र-चित्रण कीजिए।


Question 42:

'सत्य की जीत' खण्डकाव्य के आधार पर द्रोपदी चीर हरण का वृत्तान्त लिखिए।


Question 43:

'रश्मिरथी' खण्ड काव्य के आधार पर कुन्ती का चरित्र-चित्रण कीजिए।


Question 44:

'रश्मिरथी' खण्डकाव्य के आधार पर पंचम सर्ग की कथा का वर्णन कीजिए।


Question 45:

'त्यागपथी' खण्डकाव्य के आधार पर द्वितीय सर्ग की कथा का उल्लेख कीजिए।


Question 46:

'त्यागपथी' खण्डकाव्य के आधार पर नारी पात्र राजश्री का चरित्र-चित्रण कीजिए।


Question 47:

'श्रवणकुमार' खण्डकाव्य की कथा वस्तु संक्षेप में लिखिए।


Question 48:

'श्रवणकुमार' खण्डकाव्य के नायक श्रवणकुमार का चरित्र-चित्रण कीजिए।


Question 49:

'आलोकवृत्त' खण्डकाव्य के आधार पर गाँधीजी का चरित्राङ्कन कीजिए।


Question 50:

'आलोकवृत्त' खण्डकाव्य की कथा अपने शब्दों में लिखिए।


Question 51:

दिए गए संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
संस्कृतसाहित्यस्य आदिकविः वाल्मीकिः, महर्षि व्यासः, कविकुलगुरुः कालिदासः अन्ये च भास भारवि भवभूत्यादयो महाकवयः स्वकीयैः ग्रन्थरत्नैः अद्यापि पाठकानां हृदि विराजन्ते । इयं भाषा अस्माभिः मातृसमं सम्माननीया वन्दनीया च यतो भारतमातुः स्वातन्त्र्यं गौरवं अखण्डत्वं सांस्कृतिकमेकत्वं च संस्कृतेनैव सुरक्षितुं शक्यन्ते । इयं संस्कृतभाषा सर्वासु भाषासु प्राचीनतमा श्रेष्ठा चास्ति । ततः सुष्ठूक्तम् 'भाषासु मुख्या मधुरा दिव्या गीर्वाणभारती' ।


Question 52:

दिए गए संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
यथैवोपकरणवतां जीवनं तथैव ते जीवनं स्यात् । अमृतत्वस्य तु नाशास्ति वित्तेन इति । सा मैत्रेयी उवाच - येनाहं नामृता स्याम् किमहं तेन कुर्याम् । यदेव भगवान् केवलममृतत्वसाधनं जानाति, तदेव मे ब्रूहि । याज्ञवल्क्य उवाच - प्रिया नः सती त्वं प्रियं भाषसे । एहि उपविश, व्याख्यास्यामि ते अमृतत्वसाधनम् ।


Question 53:

दिए गए श्लोकों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
विद्या विवादाय धनं मदाय
शक्तिः परेषां परिपीडनाय ।
खलस्य साधोः विपरीतमेतज्
ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय ॥


Question 54:

दिए गए श्लोकों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः ।
स हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च ॥


Question 55:

निम्नलिखित मुहावरों में से किसी एक का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए: उल्टी गंगा बहाना


Question 56:

निम्नलिखित मुहावरों में से किसी एक का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए: ओखली में सिर देना


Question 57:

निम्नलिखित मुहावरों में से किसी एक का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए: काठ का उल्लू


Question 58:

निम्नलिखित मुहावरों में से किसी एक का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए: खून खौलना


Question 59:

अपठित गद्यांश: शिक्षा व्यक्ति और समाज दोनों के विकास के लिए अनिवार्य है। अज्ञान के अंधकार में जीना तो मृत्यु से भी अधिक कष्टकारी है। ज्ञान के प्रकाश में ही जीवन के रहस्य खुलते हैं और हमें अपनी पहिचान मिलती है। शिक्षा मनुष्य को मष्तिष्क और देह का उचित प्रयोग करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्यपुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिन्तन न दे व्यर्थ है। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सच्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ? संसार के सभी वैभव व सुख साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो।

(i) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।


Question 60:

अपठित गद्यांश: शिक्षा व्यक्ति और समाज दोनों के विकास के लिए अनिवार्य है। अज्ञान के अंधकार में जीना तो मृत्यु से भी अधिक कष्टकारी है। ज्ञान के प्रकाश में ही जीवन के रहस्य खुलते हैं और हमें अपनी पहिचान मिलती है। शिक्षा मनुष्य को मष्तिष्क और देह का उचित प्रयोग करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्यपुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिन्तन न दे व्यर्थ है। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सच्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ? संसार के सभी वैभव व सुख साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो।

(ii) शिक्षा को मनुष्य के लिए क्यों अनिवार्य माना गया है?


Question 61:

अपठित गद्यांश: शिक्षा व्यक्ति और समाज दोनों के विकास के लिए अनिवार्य है। अज्ञान के अंधकार में जीना तो मृत्यु से भी अधिक कष्टकारी है। ज्ञान के प्रकाश में ही जीवन के रहस्य खुलते हैं और हमें अपनी पहिचान मिलती है। शिक्षा मनुष्य को मष्तिष्क और देह का उचित प्रयोग करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्यपुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिन्तन न दे व्यर्थ है। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सच्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ? संसार के सभी वैभव व सुख साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो।

(iii) सभी वैभव प्राप्त व्यक्ति कब तक सुख नहीं प्राप्त कर सकता?


Question 62:

अपठित गद्यांश: जीवन में सफल वही है, जो उपयुक्त समय पर उपयुक्त चुनाव करना जानता है। कुछ चुनाव हमारे वश में नहीं हैं - जैसे माता-पिता का, जन्म-मृत्यु का। किन्तु कुछ हमारे वश में हैं जिन पर हमारी सफलता असफलता निर्भर है - जैसे संगति का चुनाव, आलस्य या परिश्रम का चुनाव आदि। संगति का चुनाव इन सब में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस चुनाव पर हमारा आचरण, कर्म, विचार, भाषा - स्तर, मनुष्यता और हमारी सफलता-असफलता निर्भर करती है। मनुष्य का चित्त बुराइयों की ओर जल्दी आकृष्ट हो जाता है। जिस प्रकार पानी सदैव नीचे की ओर बहता है, उसी प्रकार मनुष्य का मन भी बुराइयों की ओर शीघ्र भागता है। हम विवेक से काम लेकर अच्छे और बुरे का चुनाव कर सकते हैं और सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

(i) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।


Question 63:

अपठित गद्यांश: जीवन में सफल वही है, जो उपयुक्त समय पर उपयुक्त चुनाव करना जानता है। कुछ चुनाव हमारे वश में नहीं हैं - जैसे माता-पिता का, जन्म-मृत्यु का। किन्तु कुछ हमारे वश में हैं जिन पर हमारी सफलता असफलता निर्भर है - जैसे संगति का चुनाव, आलस्य या परिश्रम का चुनाव आदि। संगति का चुनाव इन सब में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस चुनाव पर हमारा आचरण, कर्म, विचार, भाषा - स्तर, मनुष्यता और हमारी सफलता-असफलता निर्भर करती है। मनुष्य का चित्त बुराइयों की ओर जल्दी आकृष्ट हो जाता है। जिस प्रकार पानी सदैव नीचे की ओर बहता है, उसी प्रकार मनुष्य का मन भी बुराइयों की ओर शीघ्र भागता है। हम विवेक से काम लेकर अच्छे और बुरे का चुनाव कर सकते हैं और सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

(ii) मानव मन की तुलना किससे की गई है और क्यों?


Question 64:

अपठित गद्यांश: जीवन में सफल वही है, जो उपयुक्त समय पर उपयुक्त चुनाव करना जानता है। कुछ चुनाव हमारे वश में नहीं हैं - जैसे माता-पिता का, जन्म-मृत्यु का। किन्तु कुछ हमारे वश में हैं जिन पर हमारी सफलता असफलता निर्भर है - जैसे संगति का चुनाव, आलस्य या परिश्रम का चुनाव आदि। संगति का चुनाव इन सब में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस चुनाव पर हमारा आचरण, कर्म, विचार, भाषा - स्तर, मनुष्यता और हमारी सफलता-असफलता निर्भर करती है। मनुष्य का चित्त बुराइयों की ओर जल्दी आकृष्ट हो जाता है। जिस प्रकार पानी सदैव नीचे की ओर बहता है, उसी प्रकार मनुष्य का मन भी बुराइयों की ओर शीघ्र भागता है। हम विवेक से काम लेकर अच्छे और बुरे का चुनाव कर सकते हैं और सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

(iii) जीवन में कौन सफलता प्राप्त कर सकता है?


Question 65:

निम्नलिखित शब्द-युग्मों का सही अर्थ चयन करके लिखिए: तरंग - तुरंग

  • (A) हाथी और घोड़ा
  • (B) अस्थिपंजर और निर्धन
  • (C) लहर और घोड़ा
  • (D) तेज आवाज और धीमी आवाज

Question 66:

निम्नलिखित शब्द-युग्मों का सही अर्थ चयन करके लिखिए: भवन - भुवन

  • (A) घर - संसार
  • (B) होना - भूमि
  • (C) व्यापक - संसार
  • (D) होनी - अनहोनी

Question 67:

निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द के दो सही अर्थ लिखिए: नाग


Question 68:

निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द के दो सही अर्थ लिखिए: नाक


Question 69:

निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द के दो सही अर्थ लिखिए: द्विज


Question 70:

निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द के दो सही अर्थ लिखिए: मित्र


Question 71:

निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक सही शब्द का चयन करके लिखिए: जो पढ़ना - लिखना जानता हो -

  • (A) विद्वान
  • (B) पंडित
  • (C) साक्षर
  • (D) छात्र

Question 72:

निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक सही शब्द का चयन करके लिखिए: वंदना करने योग्य -

  • (A) स्तुति
  • (B) प्रार्थना
  • (C) देवता
  • (D) वंदनीय

Question 73:

निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए: घर के सामानों को रख दो


Question 74:

निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए: मेरे को फल ले आओ


Question 75:

निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए: पक्षी पेड़ में हैं


Question 76:

निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए: शिक्षक ने क्षात्र की प्रशंसा की


Question 77:

'करुण' अथवा 'शृंगार' रस की परिभाषा एवं उदाहरण लिखिए।


Question 78:

'रूपक' अथवा 'अनुप्रास' अलंकार का लक्षण एवं उदाहरण लिखिए।


Question 79:

'चौपाई' अथवा 'दोहा' छन्द की परिभाषा लिखकर उदाहरण भी लिखिए।


Question 80:

बैंक प्रबन्धक के नाम एक आवेदन-पत्र लिखिए, जिसमें किसी व्यवसाय को स्थापित करने हेतु ऋण की माँग की गई हो।


Question 81:

निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर अपनी भाषा-शैली में निबन्ध लिखिए: अन्तरिक्ष में भारत के बढ़ते कदम


Question 82:

निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर अपनी भाषा-शैली में निबन्ध लिखिए: महिला सशक्तीकरण की उपयोगिता


Question 83:

निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर अपनी भाषा-शैली में निबन्ध लिखिए: बेरोजगारी की समस्या और समाधान


Question 84:

निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर अपनी भाषा-शैली में निबन्ध लिखिए: मेरा प्रिय खेल


Question 85:

निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर अपनी भाषा-शैली में निबन्ध लिखिए: नयी शिक्षानीति की विशेषताएँ

UP Board Class 12 General Hindi 2026 Exam Pattern and Marking Scheme Explained

The Set 302 BN paper is written in Hindi and is split into two sections of 50 marks each. Every question is compulsory, but most of them carry an internal choice.

  • Total questions: 14 questions in two sections - Khand Ka (Q1 to Q7) and Khand Kha (Q8 to Q14)
  • Total marks: 100 - 50 marks in each section
  • Duration: 3 hours 15 minutes, with the first 15 minutes given for reading the question paper
  • Khand Ka (50 marks): 10 MCQs (Q1 and Q2), a prose and a poetry passage with 5 questions each (Q3 and Q4, 10 marks each), literary biography of a writer and a poet (Q5, 5 + 5 marks), a story question (Q6, 5 marks) and a khandkavya question (Q7, 5 marks)
  • Khand Kha (50 marks): Sanskrit passage and shloka translation (Q8, 7 + 7 marks), idiom or proverb (Q9, 2 marks), unseen passage (Q10, 5 marks), word knowledge (Q11, 8 marks), rasa, alankar and chhand (Q12, 6 marks), letter writing (Q13, 6 marks) and essay (Q14, 9 marks)
  • Word limits: the literary biography of a writer (Q5a) and the story summary (Q6) carry an 80-word limit

High-Weightage Sections in UP Board Class 12 General Hindi 2026 to Focus On First

Passage-based answers and the writing questions decided most of the marks in Set 302 BN.

  • Prose and poetry passages (Q3 and Q4): 20 of 100 marks - the prose passages came from Rashtra ka Swaroop (Vasudevsharan Agrawal) and Ninda Ras (Harishankar Parsai), and the poetry passages from Nauka Vihar (Sumitranandan Pant) and Sandhya Sundari (Suryakant Tripathi 'Nirala')
  • Sanskrit translation (Q8): 14 of 100 marks - one Sanskrit prose passage and one shloka, each with 2 marks for the reference and 5 marks for the Hindi translation
  • Writing skills (Q13 and Q14): 15 of 100 marks - a 6-mark letter and a 9-mark essay; the essay topics were अन्तरिक्ष में भारत के बढ़ते कदम; महिला सशक्तीकरण की उपयोगिता; बेरोजगारी की समस्या और समाधान; मेरा प्रिय खेल; नयी शिक्षानीति की विशेषताएँ
  • MCQs on Hindi literature (Q1 and Q2): 10 of 100 marks - authors, works, literary periods and journals
  • Biographies, story and khandkavya (Q5 to Q7): 20 of 100 marks - writer and poet profiles, one story question and one khandkavya question

How to Use the UP Board General Hindi Question Paper for Practice

Treat this Set 302 BN paper as a timed mock before you check the solutions.

  • Attempt all 14 questions in 3 hours 15 minutes under exam conditions first
  • Practise both options of the choice questions, not just the one you would normally pick
  • Keep to the 80-word limit for the writer biography and the story summary
  • Write the Sanskrit translations with the reference first, since each carries 2 of its 7 marks
  • Review each answer against the step-by-step solution PDF, not just the final answer

UP Board Class 12 General Hindi 2026 Question Paper FAQs

Ques. When was the UP Board Class 12 General Hindi 2026 exam conducted?

Ans. UPMSP conducted the UP Board Class 12 General Hindi 2026 exam on February 18, 2026, in the morning shift from 8:30 am to 11:45 am, during the intermediate exams that ran from February 18 to March 12, 2026. The official time table is on upmsp.edu.in.

Ques. How many questions are there in the UP Board Class 12 General Hindi 2026 paper, and is there any choice?

Ans. The paper has 14 questions worth 100 marks, and all are compulsory. Most of them offer an internal choice, such as an OR passage in Q3 and Q4, one of three authors or poets in Q5, one khandkavya out of six in Q7 and one of five essay topics in Q14.

Ques. What is the marking scheme for UP Board Class 12 General Hindi 2026?

Ans. Q1 and Q2 are MCQs of 1 mark each, Q3 and Q4 carry 10 marks each, Q5 carries 10 marks, Q6 and Q7 carry 5 marks each, Q8 carries 14 marks, Q9 carries 2 marks, Q10 carries 5 marks, Q11 carries 8 marks, Q12 and Q13 carry 6 marks each and Q14 carries 9 marks, for a total of 100 marks in 3 hours 15 minutes.

Ques. Which questions carried the highest weightage in UP Board Class 12 General Hindi 2026 Set 302 BN?

Ans. The two passage questions (Q3 and Q4) carried 20 marks, the Sanskrit translation (Q8) carried 14 marks and the letter and essay (Q13 and Q14) carried 15 marks together.

Ques. Where can I download the UP Board Class 12 General Hindi 2026 Set 302 BN question paper with solutions PDF for free?

Ans. You can download both the question paper and the full step-by-step solutions PDF for Set 302 BN from the table at the top of this page, for free.