The UP Board Class 12 Hindi question paper with solutions (Set 301 BA) is available here for free download. UP Board Class 12 Hindi 2026 was conducted by the Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Parishad (UPMSP) on February 18, 2026, as a 100-mark paper of 14 questions to be solved in 3 hours 15 minutes.
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UP Board Class 12 Hindi 2026 (Set 301 BA) Questions with Solutions
'ध्रुवस्वामिनी' गद्य-विधा की रचना है
'त्यागपत्र' उपन्यास के लेखक हैं
'वसुधा' पत्रिका के सम्पादक हैं
राहुल सांकृत्यायन की रचना है
'मेरे निबंध' किसकी रचना है?
निम्नलिखित में से तारसप्तक के कवि हैं
'अब्र' उपनाम से उर्दू में गजलों की रचना की
'यामा' के रचयिता हैं
'अनामिका' किसकी रचना है?
'मैंने उसको जब-जब देखा - लोहा देखा' पंक्ति के रचयिता हैं
गद्यांश: राष्ट्र का तीसरा अंग जन की संस्कृति है। मनुष्यों ने युगों-युगों में जिस सभ्यता का निर्माण किया है, वही उसके जीवन की श्वास-प्रश्वास है। बिना संस्कृति के जन की कल्पना कबंध मात्र है, संस्कृति ही जन का मस्तिष्क है। संस्कृति के विकास और अभ्युदय के द्वारा ही राष्ट्र की वृद्धि सम्भव है। राष्ट्र के समग्र रूप में भूमि और जन के साथ-साथ जन की संस्कृति का महत्वपूर्ण स्थान है।
गद्यांश: राष्ट्र का तीसरा अंग जन की संस्कृति है। मनुष्यों ने युगों-युगों में जिस सभ्यता का निर्माण किया है, वही उसके जीवन की श्वास-प्रश्वास है। बिना संस्कृति के जन की कल्पना कबंध मात्र है, संस्कृति ही जन का मस्तिष्क है। संस्कृति के विकास और अभ्युदय के द्वारा ही राष्ट्र की वृद्धि सम्भव है। राष्ट्र के समग्र रूप में भूमि और जन के साथ-साथ जन की संस्कृति का महत्वपूर्ण स्थान है।
गद्यांश: राष्ट्र का तीसरा अंग जन की संस्कृति है। मनुष्यों ने युगों-युगों में जिस सभ्यता का निर्माण किया है, वही उसके जीवन की श्वास-प्रश्वास है। बिना संस्कृति के जन की कल्पना कबंध मात्र है, संस्कृति ही जन का मस्तिष्क है। संस्कृति के विकास और अभ्युदय के द्वारा ही राष्ट्र की वृद्धि सम्भव है। राष्ट्र के समग्र रूप में भूमि और जन के साथ-साथ जन की संस्कृति का महत्वपूर्ण स्थान है।
गद्यांश: राष्ट्र का तीसरा अंग जन की संस्कृति है। मनुष्यों ने युगों-युगों में जिस सभ्यता का निर्माण किया है, वही उसके जीवन की श्वास-प्रश्वास है। बिना संस्कृति के जन की कल्पना कबंध मात्र है, संस्कृति ही जन का मस्तिष्क है। संस्कृति के विकास और अभ्युदय के द्वारा ही राष्ट्र की वृद्धि सम्भव है। राष्ट्र के समग्र रूप में भूमि और जन के साथ-साथ जन की संस्कृति का महत्वपूर्ण स्थान है।
गद्यांश: राष्ट्र का तीसरा अंग जन की संस्कृति है। मनुष्यों ने युगों-युगों में जिस सभ्यता का निर्माण किया है, वही उसके जीवन की श्वास-प्रश्वास है। बिना संस्कृति के जन की कल्पना कबंध मात्र है, संस्कृति ही जन का मस्तिष्क है। संस्कृति के विकास और अभ्युदय के द्वारा ही राष्ट्र की वृद्धि सम्भव है। राष्ट्र के समग्र रूप में भूमि और जन के साथ-साथ जन की संस्कृति का महत्वपूर्ण स्थान है।
पद्यांश: रोकहिं जो तो अमंगल होय औ प्रेम नसै जो कहैं पिय जाइये। जौ कहे जाहु न तो प्रभुता जौ कहूँ न कहै तो सनेह नसाइये। जो 'हरिचंद कहैं तुमरे बिनु जीहै' न तो यह क्यौ पतिआइये। तासों पयान समै तुमरे हम का कहैं आपै हमै समझाइये।।
पद्यांश: रोकहिं जो तो अमंगल होय औ प्रेम नसै जो कहैं पिय जाइये। जौ कहे जाहु न तो प्रभुता जौ कहूँ न कहै तो सनेह नसाइये। जो 'हरिचंद कहैं तुमरे बिनु जीहै' न तो यह क्यौ पतिआइये। तासों पयान समै तुमरे हम का कहैं आपै हमै समझाइये।।
पद्यांश: रोकहिं जो तो अमंगल होय औ प्रेम नसै जो कहैं पिय जाइये। जौ कहे जाहु न तो प्रभुता जौ कहूँ न कहै तो सनेह नसाइये। जो 'हरिचंद कहैं तुमरे बिनु जीहै' न तो यह क्यौ पतिआइये। तासों पयान समै तुमरे हम का कहैं आपै हमै समझाइये।।
पद्यांश: रोकहिं जो तो अमंगल होय औ प्रेम नसै जो कहैं पिय जाइये। जौ कहे जाहु न तो प्रभुता जौ कहूँ न कहै तो सनेह नसाइये। जो 'हरिचंद कहैं तुमरे बिनु जीहै' न तो यह क्यौ पतिआइये। तासों पयान समै तुमरे हम का कहैं आपै हमै समझाइये।।
पद्यांश: रोकहिं जो तो अमंगल होय औ प्रेम नसै जो कहैं पिय जाइये। जौ कहे जाहु न तो प्रभुता जौ कहूँ न कहै तो सनेह नसाइये। जो 'हरिचंद कहैं तुमरे बिनु जीहै' न तो यह क्यौ पतिआइये। तासों पयान समै तुमरे हम का कहैं आपै हमै समझाइये।।
देख-देख नाचता हृदय बहने को महाविकल-बेकल, इस मरोर से - इसी शोर से सघन घोर गुरु गहन रोर से मुझे गगन का दिखा सघन वह छोर राग अमर! अंबर में भर निज रोर।
देख-देख नाचता हृदय बहने को महाविकल-बेकल, इस मरोर से - इसी शोर से सघन घोर गुरु गहन रोर से मुझे गगन का दिखा सघन वह छोर राग अमर! अंबर में भर निज रोर।
देख-देख नाचता हृदय बहने को महाविकल-बेकल, इस मरोर से - इसी शोर से सघन घोर गुरु गहन रोर से मुझे गगन का दिखा सघन वह छोर राग अमर! अंबर में भर निज रोर।
देख-देख नाचता हृदय बहने को महाविकल-बेकल, इस मरोर से - इसी शोर से सघन घोर गुरु गहन रोर से मुझे गगन का दिखा सघन वह छोर राग अमर! अंबर में भर निज रोर।
देख-देख नाचता हृदय बहने को महाविकल-बेकल, इस मरोर से - इसी शोर से सघन घोर गुरु गहन रोर से मुझे गगन का दिखा सघन वह छोर राग अमर! अंबर में भर निज रोर।
भाषा स्वयं संस्कृति का एक अटूट अंग है। संस्कृति परंपरा से निःसृत होने पर भी परिवर्तनशील और गतिशील है। उसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है। वैज्ञानिक आविष्कारों के प्रभाव के कारण उद्भूत नयी सांस्कृतिक हलचलों को शाब्दिक रूप देने के लिए भाषा के परंपरागत रूप पर्याप्त नहीं हैं।
भाषा स्वयं संस्कृति का एक अटूट अंग है। संस्कृति परंपरा से निःसृत होने पर भी परिवर्तनशील और गतिशील है। उसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है। वैज्ञानिक आविष्कारों के प्रभाव के कारण उद्भूत नयी सांस्कृतिक हलचलों को शाब्दिक रूप देने के लिए भाषा के परंपरागत रूप पर्याप्त नहीं हैं।
भाषा स्वयं संस्कृति का एक अटूट अंग है। संस्कृति परंपरा से निःसृत होने पर भी परिवर्तनशील और गतिशील है। उसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है। वैज्ञानिक आविष्कारों के प्रभाव के कारण उद्भूत नयी सांस्कृतिक हलचलों को शाब्दिक रूप देने के लिए भाषा के परंपरागत रूप पर्याप्त नहीं हैं।
भाषा स्वयं संस्कृति का एक अटूट अंग है। संस्कृति परंपरा से निःसृत होने पर भी परिवर्तनशील और गतिशील है। उसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है। वैज्ञानिक आविष्कारों के प्रभाव के कारण उद्भूत नयी सांस्कृतिक हलचलों को शाब्दिक रूप देने के लिए भाषा के परंपरागत रूप पर्याप्त नहीं हैं।
भाषा स्वयं संस्कृति का एक अटूट अंग है। संस्कृति परंपरा से निःसृत होने पर भी परिवर्तनशील और गतिशील है। उसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है। वैज्ञानिक आविष्कारों के प्रभाव के कारण उद्भूत नयी सांस्कृतिक हलचलों को शाब्दिक रूप देने के लिए भाषा के परंपरागत रूप पर्याप्त नहीं हैं।
निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का जीवन-परिचय देते हुए, उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द): पं० दीनदयाल उपाध्याय
निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का जीवन-परिचय देते हुए, उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द): कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर'
निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का जीवन-परिचय देते हुए, उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द): वासुदेवशरण अग्रवाल
निम्नलिखित में से किसी एक कवि का जीवन-परिचय देते हुए, उनकी प्रमुख कृतियों पर प्रकाश डालिए (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द): सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'
निम्नलिखित में से किसी एक कवि का जीवन-परिचय देते हुए, उनकी प्रमुख कृतियों पर प्रकाश डालिए (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द): जगन्नाथ दास 'रत्नाकर'
निम्नलिखित में से किसी एक कवि का जीवन-परिचय देते हुए, उनकी प्रमुख कृतियों पर प्रकाश डालिए (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द): सुमित्रानंदन पंत
'खून का रिश्ता' कहानी के प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए। (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द)
'लाटी' कहानी के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए। (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द)
'रश्मिरथी' खण्डकाव्य के अंतिम सर्ग की घटना पर प्रकाश डालिए।
'रश्मिरथी' खण्डकाव्य के आधार पर 'कुन्ती' को चरित्र-चित्रण कीजिए।
'श्रवण कुमार' खण्डकाव्य के प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए।
'श्रवण कुमार' खण्डकाव्य की विशेषताएँ संक्षेप में लिखिए।
'आलोक-वृत्त' खण्डकाव्य की प्रमुख घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
'आलोक-वृत्त' खण्डकाव्य के आधार पर 'महात्मा गाँधी' का चरित्र-चित्रण कीजिए।
'मुक्तियज्ञ' खण्डकाव्य की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
'मुक्तियज्ञ' खण्डकाव्य की प्रमुख घटनाओं पर प्रकाश डालिए।
'त्यागपथी' खण्डकाव्य की वह घटना जो आपको प्रेरणादायी लगी हो, उसका संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
'त्यागपथी' खण्डकाव्य के प्रमुख नारी पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए।
'सत्य की जीत' खण्डकाव्य के आधार पर 'युधिष्ठिर' का चरित्रांकन कीजिए।
'सत्य की जीत' खण्डकाव्य की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
संस्कृतस्य साहित्यं सरसं, व्याकरणश्च सुनिश्चितम् । तस्य गद्ये पद्ये च लालित्यं, भावबोधसामर्थ्यम्, अद्वितीयं श्रुतिमाधुर्यश्च वर्तते । किं बहुना चरित्रनिर्माणार्थं यादृशीं सत्प्रेरणां संस्कृतवाङ्मयं ददाति न तादृशीं किश्चिदन्यत् । मूलभूतानां मानवीयगुणानां यादृशी विवेचना संस्कृतसाहित्ये वर्तते, नान्यत्र तादृशी । दया, दान, शौचम्, औदार्यम्, अनसूया, क्षमा अन्ये चानेके गुणाः अस्य साहित्यस्य अनुशीलनेन सञ्जायते ।
निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए
अतीते प्रथमकल्पे चतुष्पदाः सिंहं राजानमकुर्वत् । मत्स्या आनन्दमत्स्यं, शकुनयः सुवर्णहंसम् । तस्य पुनः सुवर्णराजहंसस्य दुहिता हंसपोतिका अतीव रूपवती आसीत् । स तस्यै वरमदात् यत् सा आत्मनश्चिररुचितं स्वामिनं वृणुयात् इति । हंसराजः तस्यै वरं दत्वा हिमवति शकुनिसङ्घे संन्यपतत् । नानाप्रकाराः हंसमयूरादयः शकुनिगणाः समागत्य एकस्मिन् महति पाषाणतले संन्यपतन् ।
निम्नलिखित संस्कृत पद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
अनाकृष्टस्य विषयैर्विद्यानां पारदृश्वनः । तस्य धर्मरतेरासीद् वृद्धत्वं जरसा विना ।।
निम्नलिखित संस्कृत पद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए
न चौरहार्यं न च राजहार्यं न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि । व्यये कृते वर्द्धत एव नित्यं विद्याधनं सर्वधनं प्रधानम् ।।
निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए। (क) मूर्खाणां कालः कथम् गच्छति?
निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए। (ग) हिन्दू विश्वविद्यालयस्य संस्थापकः कः आसीत्?
'हास्य' रस अथवा 'करुण' रस की परिभाषा लिखकर एक उदाहरण दीजिए।
उपमा अलंकार अथवा श्लेष अलंकार की परिभाषा लिखकर एक उदाहरण दीजिए।
'सोरठा' छन्द अथवा 'वसन्ततिलका' छन्द की परिभाषा लिखकर एक उदाहरण दीजिए।
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए: सोशल मीडिया : वरदान या अभिशाप
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए: जीवन और समय प्रबन्धन
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए: वन-संरक्षण का महत्त्व
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए: राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए: विश्व में हिन्दी के बढ़ते कदम
'निश्चयः' का सन्धि-विच्छेद है
'प्रोषति' का सन्धि-विच्छेद है
'गायति' का सन्धि-विच्छेद है
निम्नलिखित में से किसी एक पद का विग्रह करके समास स्पष्ट कीजिए: महादेवः
निम्नलिखित में से किसी एक पद का विग्रह करके समास स्पष्ट कीजिए: नीलकमलम्
निम्नलिखित में से किसी एक पद का विग्रह करके समास स्पष्ट कीजिए: अनुरूपम्
निम्नलिखित में से किन्हीं दो शब्दों में प्रत्यय बताइए। 'खादित्वा' शब्द में प्रत्यय है
निम्नलिखित में से किन्हीं दो शब्दों में प्रत्यय बताइए। 'गन्तव्यः' शब्द में प्रत्यय है
निम्नलिखित में से किन्हीं दो शब्दों में प्रत्यय बताइए। 'श्रीमान्' शब्द में प्रत्यय है
रेखांकित पदों में से किसी एक पद में प्रयुक्त विभक्ति तथा सम्बन्धित नियम लिखिए: कृष्णम् अभितः गोपाः।
रेखांकित पदों में से किसी एक पद में प्रयुक्त विभक्ति तथा सम्बन्धित नियम लिखिए: त्वं मया सार्धम् आपणं चल।
रेखांकित पदों में से किसी एक पद में प्रयुक्त विभक्ति तथा सम्बन्धित नियम लिखिए: प्रजाभ्यः स्वस्ति।
मुहल्ले में आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए नगर निगम को एक पत्र लिखिए।
कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर अपने मित्र को बधाई देते हुए पत्र लिखिए।
UP Board Class 12 Hindi 2026 Exam Pattern and Marking Scheme Explained
UPMSP set this paper (Set 301 BA) in two sections - Section A on the prescribed Hindi textbooks, and Section B on Sanskrit translation and grammar.
- Total questions: 14 questions across MCQs, comprehension passages (गद्यांश/पद्यांश), essay, khand-kavya (खण्डकाव्य) and kahani (कहानी) answers, and Sanskrit translation and grammar
- Total marks: 100
- Duration: 3 hours 15 minutes
- Question types: objective MCQ, comprehension-based short answers, character sketches and essay-type long answers, and Sanskrit-Hindi translation
- Internal choice: most short-answer, khand-kavya, kahani, translation and letter-writing questions offer an "अथवा" (OR) alternative - attempt only one from each pair
High-Weightage Sections in UP Board Class 12 Hindi 2026 to Focus On First
This paper leans heavily on the prescribed khand-kavya (खण्डकाव्य) and kahani (कहानी) answers and the two comprehension passages, which together make up close to half the paper.
- Khand-kavya character sketches and event summaries (Q7): 30 of 100 marks across six khand-kavya titles - Rashmirathi, Shravan Kumar, Alok-Vrit, Muktiyagya, Tyagpathi and Satya ki Jeet
- Comprehension passages (Q3 gadyansh, Q4 padyansh): 20 of 100 marks combined
- Author/poet life sketches and essay (Q5, Q11): 14 of 100 marks combined
- Sanskrit translation (Q8): 14 of 100 marks
- Grammar - sandhi, samas, pratyay, vibhakti (Q12, Q13): 9 of 100 marks
UP Board Class 12 Hindi Question Paper Analysis Video
Source: SKM study
How to Use the UP Board Hindi Question Paper for Practice
Treat this Set 301 BA paper as a timed mock before you check the solutions.
- Attempt all 14 questions in 3 hours 15 minutes under exam conditions first
- For every question offering an "अथवा" (OR) alternative, practise both options, not just the one you'd normally pick
- Revise all six khand-kavya (खण्डकाव्य) titles and both kahani (कहानी) stories, since Q6 and Q7 alone carry 35 marks
- Review each answer against the step-by-step solution PDF, not just the final answer
UP Board Class 12 Hindi Student Reactions 2026
- Reactions to this paper were mixed - the MCQ and grammar sections felt straightforward for students who had revised the textbook thoroughly, while the khand-kavya section (Q7, six choices) needed careful time management given how many titles it covers
UP Board Class 12 Hindi 2026 Question Paper FAQs
Ques. When was the UP Board Class 12 Hindi 2026 exam conducted?
Ans. UPMSP conducted the UP Board Class 12 Hindi 2026 exam on February 18, 2026, as part of the intermediate exams that ran from February 18 to March 12, 2026.
Ques. How many questions are there in the UP Board Class 12 Hindi 2026 paper, and is there any choice?
Ans. The paper has 14 questions worth 100 marks across two sections. Most of the short-answer, khand-kavya, kahani, translation and letter-writing questions offer an "अथवा" (OR) alternative - you only need to attempt one from each pair.
Ques. What is the marking scheme for UP Board Class 12 Hindi 2026?
Ans. The paper carries 100 marks in 3 hours 15 minutes across MCQs, comprehension passages, khand-kavya and kahani answers, an essay, and Sanskrit translation and grammar questions.
Ques. Which sections had the highest weightage in UP Board Class 12 Hindi 2026 Set 301 BA?
Ans. The khand-kavya character sketches and event summaries (Q7) carried the most marks at 30 of 100, followed by the two comprehension passages (Q3, Q4) at 20 marks combined and Sanskrit translation (Q8) at 14 marks.
Ques. Where can I download the UP Board Class 12 Hindi 2026 question paper with solutions PDF for free?
Ans. You can download both the question paper and the full step-by-step solutions PDF for Set 301 BA from the table at the top of this page, for free.








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